घर जले या लोग मरे, कुछ को तो बस सियासत चमकानी है

दिल्ली की आवाम जिसे सिर्फ मोहब्बत निछावर करने के लिये जाना जाता है, वो आज अपने ही घर में आग लगाने के चलते सुर्खियों में बने हुए है और कुछ लोग इसी आग में रोटियां सेकने के लिए निकल पड़े है।

एक तरफ तमाम न्यूज चैनल में सिर्फ दिल्ली जलने की खबर आ रही है, तो दूसरी तरफ सरकार इस आग को बुझाने के लिये तेजी से प्रयास करने में जुटी है, खुद पीएम मोदी ट्वीट करके लोगों से अमन बनाने की बात कर रहे है, तो दूसरी तरफ कुछ लोग इस पर भी सियासत करके एक वर्ग को खुश करने में जुट गये है।

लाश की सियासत से करो तौबा

ये वही लोग है जो पहले दिल्ली में आग लगाने के लिये लोगों को उकसाते है, और जब दिल्ली जलने लगी तो यही लोग सरकार और पुलिस पर सवाल खड़े करके मासूम बन रहे है। जिसपर ये शायरी याद आ रही है

‘ये क्या जगह है दोस्तों, ये कौन सा दयार है,
हद-ए-निगाह तक जहाँ गुबार ही गुबार है।‘

मतलब कुछ भी हो,इन्हे तो केवल मोदी सरकार पर तंज कसने का मौका चाहिये साथ ही साथ ये दिखाने में ये लग जाते है कि एक वर्ग पर बहुसंख्यक वर्ग हमला करने पर लगा हुआ है।

जबकि पहले तो अपने भाषणों से ऐसे लोग लोगों को धरना देने देश में अपने हक के लिये जान की बाजी लगाने की बाते करते है। फिर उन्हे सड़क पर प्रदर्शन करने की राय देते है औऱ देश की भोलीभाली जनता जब इनके उकसाने पर सड़क पर हंगामा करती है, तो ये पुलिस को बदनाम करके सरकार पर हमला बोलते है। मजे की बात ये है कि पर्दे के पीछे से आग लगाने वाले ये लोग पर्दे के पीछे ही छुपे रहते है और सड़को पर मासूम लोगों की खून की होली को देखकर इस बात पर खुश होते है, कि वो अपने मकसद में कामयाब हो गये है।

पर अब वक्त आ गया है कि देश के लोग ऐसे लोगो से सावधान हो जाये जिससे देश में अमन बन सके। जिससे आने वाले वक्त में ऐसे हालात न बने। क्योकि अभी भी वक्त है वरना आने वाला वक्त में जो स्थिति बनेगी वो काफी कठिन हो जायेगा। इस लिये अभी से सचेत हो जाये तो बेहतर होगा।