गृहमंत्री अमित शाह आज पेश करेंगे जम्मू-कश्मीर आरक्षण संशोधन विधेयक

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ( प्रतीकात्मक इमेज )

सत्रहवें लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद मोदी 2.0 में केंद्रीय गृह मंत्री बने अमित शाह आज अपना पहला विधेयक पेश करेंगे| पहले इसे अध्यादेश के रूप में संसद ने 28 फरवरी को मंजूरी दे दी थी और इस पर भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की भी मुहर लग चुकी है|

संसद में आज पेश होने वाला ये विधेयक जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 को संशोधित करेगा| इस विधेयक में जम्मू और कश्मीर में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की बात थी| संशोधन के बाद अब जम्मू और कश्मीर में सीमा के भीतर रहने वाले लोगों को भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बराबर आरक्षण मिलेगा।

इस विधेयक के बाद अब विस्थापितों को भी मिलेगा आरक्षण का लाभ

उल्लेखनीय है कि राज्य में पहले सरकारी नौकरी में आरक्षण, सरकारी सब्सिडी, और पदोन्नति का लाभ सिर्फ उन्हें ही मिल पाता था जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास अथवा सरकार द्वारा चिन्हित पिछड़े क्षेत्रों में रह रहे थे| आरक्षण का लाभ उठाने के लिए किसी व्यक्ति का कम से कम 15 सालों से पिछड़े क्षेत्र का निवासी होना अनिवार्य था| इस के चलते घाटी से विस्थापित नागरिकों अथवा पिछड़े क्षेत्रों के पूर्व निवासियों को जो सुरक्षा कारणों से अपने वास्तविक मूल निवास से प्रवास कर गए थे, उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाता था|

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार जम्मू और कश्मीर में पूर्ण शांति बहाल करने के लिए कृतसंकल्प है| इसके लिए आतंक विरोधी गतिविधियों में काफी तेजी आई है और आतंकियों की कमर तोड़ने के लिए सेना और अर्धसैनिक बल कश्मीर में एड़ी-चोटी एक किये हुए हैं| लेकिन साथ ही सरकार की प्रतिबद्धता वहां के नागरिकों को मुख्य धारा से जोड़ने की भी है| जिसके लिए रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मुलभुत जरूरतों को पूरा करना भी सरकार की प्राथमिकता है|