होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥

सुंदर कांड की ये चौपाई तब से मेरे मुख से बार बार निकल रही है, प्रभु की कृपा भयाऊ सब काजू जनम हमार सुफल भा आजू? क्योंकि हकीकत में आज  मैं हर्ष से परिभूत हूं क्योंकि मैं उन चंद खुशकिस्मत धनी लोगों में से हूँ जिसके सामने भगवान राम का मंदिर अयोध्या में बनना शुरू होगा इस बात को सोच-सोच के मैं आज इतरा रहा हूँ और सोच रहा हूँ जब मैं सिर्फ इन शब्दों से अत्यंत प्रसन्न हो रहा हूँ तो पीएम मोदी जी कितने आनंद में होंगे जिन्होंने राम मंदिर का ख्वाब खुद बुना था।

 

 

5 अगस्त को पीएम करेंगे भूमिपूजन

सोचता हूँ कि जब पीएम मोदी अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन के लिए जाएंगे उस वक्त वो दिल्ली से अयोध्या के बीच क्या सोच रहे होंगे। मुझे लगता है कि उनके सामने हर वो घटना आयेगी जिसको एक कारसेवक के तौर पर उन्होंने जिया था उन्हें हर वो मंजर ध्यान आयेगा जब मन में आस्था के प्रतीक प्रभू राम का भव्य मंदिर की कामना को लेकर वो 1992 में अडवाणी जी के सारथी बनकर निकले थे।  लेकिन पीएम मोदी ने ये भी साफ कर दिया है कि उन्हें जितना प्रभू राम पर विश्वास है उतना ही भारत के संविधान पर भी तभी तो वो लगातार ये कहते आये थे कि संविधान से जो फैसला होगा वो उसपर पूरा ऐतबार ऱखकर कदम उठाएंगे। इसलिये तो उन्होंने राम मंदिर विवाद के मामले को जल्द सुलझाने के लिए कोर्ट में कार्यवाही तेज करने का फैसला लिया था जिसका असर ये हुआ कि देश आज रामलला का भव्य मंदिर बनता हुआ देखने जा रहा है। जिसका भूमिपूजन उनके हाथ होने जा रहा है जिन्होंने  आजाद भारत में रामलला के लिए संघर्ष का एक दौर देखा था।

बढ़ाई जाएगी राम मंदिर की ऊंचाई

अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के मॉडल में थोड़ा बदलाव किया गया है और ये बदलाव मंदिर को और अधिक भव्य बनाने के लिए किया गया है। जानकारी के मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में तय हुआ है कि राम मंदिर की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। पहले मंदिर  की ऊंचाई 128 फीट तय थी, जो अब बढ़ाकर 161 फीट की जाएगी। इसके अलावा अब गर्भगृह के आसपास 5 गुंबद बनाए जाएंगे। ट्रस्ट की बैठक में तय हुआ है कि राम मंदिर का निर्माण 3 साल के अंदर पूरा कर लिया जाएगा यानी 2023 तक अयोध्या में दुनिया का सबसे भव्य राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा। राम मंदिर के लिए अभी पत्थर पूरे नहीं हैं, पत्थरों की आपूर्ति के लिए श्रवण कमेटी का गठन किया जाएगा। इसके साथ साथ मंदिर के साथ अयोध्या नगरी को भी राममय बनाने पर विचार किया जा रहा है। जिससे शहर को नया रूप मिल सके। इसके लिए राज्य सरकार ने भी कई योजना बनाई है जिसकी शुरूआत भी हो गई है। सरयु नदी के घाटों को खूबसूरत बनया जा रहा है तो शहर में राम जी की एक प्रतिमा को लगाने का कार्य भी चल रहा है। ऐसे में बस अब ज्यादा इंतजार नही होगा और लगता यही है कि जल्द से जल्द ये सब बनकर तैयार हो जिसके बाद प्रभु राम के दर्शन हो सके।

अतित में झांक कर देखा जाये तो रामलला मंदिर निर्माण को लेकर युगों पुराने रोड़े हट चुके हैं ये किसी सपने जैसा ही लगता है लेकिन कहते हैं ना होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ और आज समझ में आया कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने ये दोहा क्यों लिखा क्योंकि राम जी की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नही हिलता