नहीं थे दोनों हाथ, मुंह से पेन पकड़ कर दिया परीक्षा, नतीजे सुन कर आप चौंक जायेंगे

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कहते हैं पंखों से क्या होता है, हौसले से उड़ान होती है| कुछ ऐसा ही कर दिखाया है हिमाचल के रजत ने! हम सबने अक्सर अपनी कक्षाओं में पढाई के दौरान सुना है कि इन्सान में अगर किसी चीज को करने के लिए हौसले व जूनून हो, तो चाहे परस्थिति उसके कितनी भी प्रतिकूल हो, वो कर गुजरता है| हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के आनी जिले के रहने वाले रजत की कहानी सुनकर आपको फिर से अपने क्लास में कहें गए उन बातो पर यकीन करने का मन होगा|

दरअसल, हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड के 12वीं क्लास के नतीजे में आनी के रजत ने 80.08 फीसदी अंक हासिल किये है| रजत ने ये अंक ऐसे परिस्थिति में हासिल किये जब उसने मुंह से पेन पकड़कर परीक्षा दी थी|

करंट से झुलसने के वजह से काटने पड़े थे हाथ

वो 24 मार्च 2001 का दिन था जब जयराम और दिनेश कुमारी के यहां रजत की जन्म हुई थी| रजत ने तब मुश्किल से होश ही संभाला होगा जब उसके ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा| 27 अक्तूबर 2009 को हुए दर्दनाक हादसे में रजत बिजली की एचटी लाइन की चपेट में आ गया| जान तो बच गई, लेकिन रजत को दोनों हाथ गँवाने पड़े| अब बिन हाथों के रजत ने अपनी एक अलग पहचान कायम की है| रजत की माँ दिनेश कुमारी बताती है कि इस घटना के बाद उन पर दुखों का पहाड़ से टूट गया, लेकिन रजत ने हिम्मत नहीं हारी| अब बस फ़र्क सिर्फ इतना है कि कामयाबी की इस इबारत को लिखने के लिए उनके पास हाथ नहीं है| बिन हाथ रजत ने साबित कर दिखाया है कि अगर किसी काम को करने की ललक आपके मन मे हैं तो उसके परिणाम आपसे दूर नहीं|

बीते सोमवार को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के 12वीं के परीक्षा के नतीजे आये| और घरवालो को पता चला कि रजत ने साइंस में 500 में से 404 यानी कि 80.80 फ़ीसदी अंक हासिल किए हैं| तो घरवालो के ख़ुशी का ठिकाना न था| और भी हो क्यों न, रजत ने सारी परिस्थितियां अपने खिलाफ होते हुए वो कर दिखाया था| जो बहुत लोग अनुकूल परिस्थितियाँ रहते हुए भी नहीं कर पाते है|

दसवीं में भी बजाया था डंका

आप यह जानकर हैरान हो जायेंगे कि रजत ने अब तक सभी परीक्षाएं मुँह और दाँतों की मदद से खुद लिखी है| इसके लिए रजत ने अलग से किसी राइटर का सहारा नहीं लिया| इससे पहले रजत ने दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं में भी मुँह से लिखकर 700 में से 613 अंक हासिल किए थे| इतना ही नहीं, रजत बिना हाथो ऐसी चित्रकारिता करता है, जिसे देख कर बड़े-बड़े दिग्गज चित्रकारिता भी दंग रह जाये| रजत इसके अलावा फुटबॉल, क्रिकेट जैसे खेल भी खेलता है|

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पेशे से शारीरिक शिक्षक रजत के पिता जयराम कहते हैं कि बेटा होनहार है और वह हमेशा उसके सपनों के साथ है| रजत ने अपने दम पर वो सब कर दिखाया, जो वह करना चाहता था| ऐसे होनहार बेटे पर पिता का गौरवान्वित होना लाज़िमी है| माता दिनेश कुमारी बतलाती है कि हादसे के बाद से रजत ने धीरे-धीरे अपना सारा काम स्वयं करना सीख लिया था| वो खुद अपने पैर से गोल रोटियां भी बना लेता हैं|

औरों से अलग है रजत

हिमालयन मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल आनी के प्रधानाचार्य महेंद्र ठाकुर रजत की उपलब्धि से गदगद है| रजत के प्रधानाचार्य महेंद्र ठाकुर कहते है कि रजत अन्य सभी लड़कों से अलग है| उसका जोश और जुनून अन्य छात्रों सहित हमें भी एक नई प्रेरणा देता है| रजत केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि खेलकूद व अन्य गतिविधियों में भी अव्वल है|