मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हुआ काम 

कोरोना की छाया के बीच शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में लोक सभा और राज्यसभा ने काम का नया इतिहास रच दिया। मानसून सत्र में लोक सभा की कार्य उत्पादकता 167 प्रतिशत रही। जो लोकसभा के किसी भी सत्र में सर्वाधिक है। दस दिन चले सत्र में 25 विधेयक पारित किए गए और कई अन्य रिकॉर्ड भी बने।

लोक सभा में इस बार नहीं रखी गई कोई छुट्टी

संसद सत्र के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब लोकसभा और राज्य सभा में कोई भी दिन अवकाश नही रहा है। 8वीं लोकसभा के तीसरे सत्र में काम करने का प्रतिशत की बात करे तो कार्य उत्पादकता 163 प्रतिशत रही थी जबकि इस बार के मॉनसून सत्र के दौरान 167 प्रतिशत कार्य उत्पादकता रही, जो लोकसभा के इतिहास में सर्वाधिक है। इस दौरान कुल 10 बैठकों में 37 घंटों के कार्य के स्थान पर 60 घंटे काम हुआ जो निर्धारित समय से डेढ़ गुना से भी अधिक है। सत्र के दौरान विधायी कार्यों को 68 प्रतिशत और अन्य कार्यों को 32 प्रतिशत समय दिया गया। सत्र के दौरान 16 विधेयक पुनस्थापित किए गए तथा 25 विधेयक पारित किए गए। वहीं इस बार 370 सदस्यों को विषय उठाने का अवसर मिला, जो दुगुने से भी अधिक है। सत्र के दौरान 20 सितंबर को कुल 88 सदस्यों ने शून्य काल में अपनी बात रखी और 78 महिला सदस्यों में से तकरीबन 60 महिला सदस्यों को बोलने का अवसर मिला। ऑकड़ो पर नजर डाले तो इस सत्र में सरकार ने 99 फीसदी पूछे गये सवालों का जवाब दिया।

सत्र के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का रखा गया खास ध्यान

पूरे सत्र के दौरान दोनो सदन में स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। सांसदों, उनके परिजनों, निजी स्टाफ के साथ लोकसभा अधिकारियों-कर्मचारियों व मीडियाकर्मियों समेत 8029 व्यक्तियों के कोविड टेस्ट किए गए। देश में कोविड की स्थिति पर 5 घंटे 8 मिनट की गंभीर चर्चा भी हुई।

राज्य सभा में  104.47 प्रतिशत कामकाज हुआ

मानसून सत्र में राज्यसभा इस बार कुछ ज्यादा ही चर्चा में रही जिसके चलते यहां पर एक तरफ जोरदार हंगामा देखने को मिला तो दूसरी तरफ काम करने के लिये सांसदों में जोश भी खूब देखा गया। जिसका परिणाम ये हुआ कि  इस सत्र के दौरान 104.47 प्रतिशत कामकाज हुआ। हंगामे में समय खराब होने की भऱपाई करते हुए राज्य सभा ने तीन घंटे 26 मिनट अतिरिक्त बैठकर कामकाज किया। सत्र के अंतिम दिन 6 बिल पास किये गये जो देश के विकास के लिये बहुत जरूरी थी। कोरोना के चलते ये सत्र अपने तय समय से पहले ही खत्म हो गया हो लेकिन इस सत्र में काम करने की स्पीड कम नही हुई।

वैसे जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से ही संसद में काम करने का नया तरीका देखा जा रहा है। हर सत्र में कुछ न कुछ नये इतिहास बनते ही है और लगता है कि आगे भी ऐसे ही लोकसभा राज्य सभा अपने बनाये रिकार्ड को खुद ही तोड़ती रहेगी।