बस और ट्रेन जला कर संविधान बचाने वालों को पहले कभी देखा है आपने?

नागरिकता कानून के नाम पर हो रहा विरोध प्रदर्शन, हिंसक झड़प और आगजनी ख़बरें देश के कई अलग अलग हिस्से से आ रही है। दिल्ली और बंगाल में हुई हिंसा की तस्वीरें पूरे देश ने देखी, किस तरह देश का सुकून को छीनने के लिए बड़ी साजिश हो रही है। दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में विपक्षी पार्टियों के इशारे पर सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। भारतीय रेलवे के अनुसार हिंसा और अगजनी से अब तक 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। छात्रों के नाम पर दिल्ली की सड़क पर ऐसी भीड़ मौजूद थी जो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रही थी। पुलिसवालों पर पथराव कर रही थी। लेकिन यही लोग शाम के बाद पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठ गए। देश को ये बताने की कोशिश होने लगी कि पुलिस ने छात्रों पर ज्यादती की है। नागगरिकता कानून की आड़ में पूरे देश को दहलाने की नापाक साजिश रची जा रही है।

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पिछले कुछ दिनों से नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रही हिंसा की तस्वीरें इस बात का प्रमाण है कि हमारे देश में कुछ लोग संविधान की रक्षा के नाम पर संविधान की ही धज्जियां उड़ा रहे हैं। उससे बड़ा मजाक ये है कि कुछ लोग इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन बता रहे है। लेकिन जो इन्हे शांतिदूत बता रहे थे उन लोगो को सुप्रीम कोर्ट ने जोर का झटका दिया है। जामिया हो या दूसरी कई जगह पुलिस कार्यवाही को गलत बताने वालों ने जब कोर्ट में इस कार्यवाही के खिलाफ केस दर्ज किया तो कोर्ट ने उन लोगों को सीधे सीधे फटकार लगाई है, साथ ही कई सवाल भी पूछे है। पहली बार देखा गया कि कोर्ट किसी प्रदर्शन में पुलिस कार्यवाही को सही करार दे रही है।

बस,कार और ट्रेन जला कर संविधान बचाने वाले ऐसे प्रदर्शनकारियों को पहले कभी आपने नहीं देखा होगा? ऐसे लोग प्रदर्शन और विरोध के नाम पे अपना अलग एजेंडा चला रहे है। CAA कानून को लेकर जिस तरह से पूरे देश में उबाल देखा जा रहा है, सड़को पर उग्र प्रदर्शन हो रहे है। लेकिन नागरिकता कानून के विरोध का और संविधान बचाने का ये कैसा तरीका है, जो देश को जला रही है।

दिल्ली में नागरिकता कानून के नाम पर हो रहा विरोध प्रदर्शन, हिंसक झड़प और आगजनी, ये कैसा विरोध का तरीका है? इन्हीं उग्र प्रदर्शन को शांत करने के लिए पुलिस कार्यवाही भी जारी है, पर कुछ लोग इस पुलिस कार्यवाही पर भी सवाल उठा रहे है। जबकि कोर्ट का भी कहना है कि अगर कोई पथराव करे, बस को तोड़े तो हम पुलिस से कैसे कह सकते है कि वो कार्यवाही न करें। प्रदर्शनकारियों को ये खुली आज़ादी किसने दी है, की वो देश की संपत्ति को नुकसान पंहुचा रहे है। वहीँ कोर्ट ने CAA को वापस लेने वाली याजिका को भी खारिज करके ये दिखाया कि सत्य हमेशा सत्य होता है।

गौरतलब है की नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी पारित होने के बाद राष्ट्रपति ने इसे अपनी स्वीकृति देकर कानून का रूप दे दिया। सरकार द्वारा बार बार कहा जा रहा है कि इस बिल से किसी मुस्लिम का हित या हक़ नहीं मर रहा है, ना उसके संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है। क्योंकि यह बिल उन बाहरी देशों के लोगों के लिए है जो भारत के हैं ही नहीं फिर अगर कोई ये कहता है कि इस बिल से भारत के मुस्लिमों की उपेक्षा या देश को हिंदू-मुस्लिम में बांटने की कोशिश हो रही है तो माना जा सकता है कि वो अपने हित के लिए देश के लोगों खासतौर से मुस्लिमों को बरगला रहा है।

इस बिल से किसी भारतीय का हित या अहित नहीं होने जा रहा है। बल्कि बाहर से आए लोगों का हित या अहित होगा। कुछ राजनीतिक पार्टियां अपने वोट बैंक का जुगाड़ में इस बिल में मुस्लिमों को शामिल करने की बात कर रहे हैं तथा भ्रम और डर का माहौल पैदा करना चाह रहे है।

इसी भ्रम के माहौल के बीच कई तबकों ने इसका विरोध जारी रखा है। दिल्ली, अलीगढ़, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई, लखनऊ समेत कई शहरों में नए कानून के विरोध में रैलियां और प्रदर्शन निकाली गईं। इन उग्र प्रदर्शन को देख के कहीं से ऐसा नहीं लगता की, ये संविधान बचाने के मकसद से किया जा रहा है; क्योकि संविधान को बचाने के लिए आगजनी, बसों और रेलवे को नुकसान, पत्थरबाज़ी ये तो नहीं हो सकता है ना।

इससे तो सिर्फ हम भारतीय नागरिकों का ही नुकसान होगा। इसलिए यह बेवजह का उग्र विरोध बंद होना चाहिए।

पीएम मोदी की अपील

जबकि पीएम मोदी एक बार नही बल्कि दो बार ये अपील भी कर चुके है कि जबतक उनकी सरकार इस देश में है, किसी भी अल्पसंख्यक को न ही परेशान किया जायेगा और जो अधिकार उन्हे मिले है उनसे कोई छीन भी नही सकता है। पीएम मोदी ने कहा है कि उनका सबसे बड़ा धर्म ग्रंथ सविधान है और उनका मंत्र सबका साथ, सबका विश्वास है उनकी सरकार इसके लिये ही काम करने में लगी हुई है।