भारत की स्थिति यूरोपीय देशों की तुलना मे बेहतर : डॉ. हर्षवर्धन

देश में कोरोना वायरस से संक्रमण के मामलों में तेजी जरूर आई है, फिर भी यहां की स्थिति यूरोपीय देशों के मुकाबले बेहतर है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने यह दावा करते हुए कहा कि दिल्ली मरकज की एक घटना ने अचानक पूरा माजरा ही बदल दिया। भविष्य की तैयारियों पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश के किसी भी कोने में स्वास्थ्य उपकरणों की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने को पूरी तरह तैयार है।

यूरोपीय देशों का हाल

पिछले कुछ हफ्तों से यूरोप इस संकट का केंद्र बना हुआ है, लेकिन ऐसे संकेत मिले हैं कि यह महामारी वहां चरम पर पहुंच सकती है। स्पेन और ब्रिटेन में 24 घंटे के दौरान क्रमश: 950 और 569 लोगों की मौत हुई हैं। अकेले इटली और स्पेन में ही पूरी दुनिया में मरने वाले लोगों की आधी संख्या है।

यूरोपीय देशों की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन के साथ-साथ प्रिंस चार्ल्स तक कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। प्रधानमंत्री जॉनसन ने ‘बड़ी संख्या में लोगों की जांच’ करने का आह्वान किया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आने वाले हफ्तों में एक दिन में 1 लाख लोगों की जांच करने का लक्ष्य है। खुद कोविड-19 की चपेट में आए जॉनसन की बड़े पैमाने पर जांच न कराने के लिए आलोचना की गई।

पस्त है सबसे ताकतवर अमेरिका

दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका को ही ले लें। वहां गुरुवार को बीते 24 घंटों में ही 1,169 लोगों की मौत हो गई। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक यह अपने आप में एक रेकॉर्ड है। इससे पहले इटली में 27 मार्च को 969 लोगों की मौत हो गई थी। वॉइट हाउस के विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से 1 लाख से 2.40 लाख अमेरिकी जान गंवा सकते हैं।

जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस से संक्रमण के 30 हजार नए मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही अमेरिका में इस महामारी से मरने वालों की संख्‍या 5,926 पहुंच गई है। अमेरिका का वुहान कहे जाने वाले न्‍यूयॉर्क शहर में मरने वालों की संख्‍या 1500 पहुंच गई है। करीब 50 हजार लोग न्‍यूयॉर्क में कोरोना वायरस से संक्रमित हैं।

आखिर हर्षवर्धन की बात में दम क्यों है

अब अगर भारत की बात करें तो यहां पिछले कुछ दिनों से कोविड-19 मरीजों की तादाद में तेजी जरूर आई है, लेकिन हकीकत है कि नए 60% मामलों का लिंक एक घटना से है और वह है निजामुद्दीन मरकज में तबलिगी जमात का धार्मिक कार्यक्रम ‘जोड़।’

देश में अगर 2088 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई तो 156 मरीज ठीक होकर घर भी लौट गए। कोविड-19 के कारण मरने वालों की तादाद अब तक दहाई अंकों में ही सीमित है। हालांकि, बीमारी से एक मौत भी दुखद है, लेकिन इस भयावह महामारी में सिर्फ 56 मौतों के साथ भारत सच में यूरोपीय देशों से बेहतर स्थिति में है।