HAL बना रहा स्वार्म ड्रोन, बिना नुकसान बालाकोट जैसी घटना को अंजाम दिया जा सकेगा

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Drone_Swarm

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) वायुसेना की कार्य कुशलता और कॉम्बैट ऑपरेशन को बेहतर तरीके से बिना नुकसान अंजाम देने के लिए एक स्वार्म ड्रोन बना रहा है| बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप न्यू स्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज, के साथ संयुक्त रूप से HAL द्वारा बनाया गया ये ड्रोन वायुसेना की मारक क्षमता में कई गुना इजाफ़ा करेगा|

क्या है स्वार्म ड्रोन

आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की क्षमता से लैश ये ड्रोन वायुसेना के किसी भी अन्य विमान से लांच किये जा सकेंगे| इन्हें विमान के विंग्स में लगाया जा सकेगा, और पायलट सही स्थान का चयन कर इन्हें लांच कर सकेंगे| लांच के बाद इन्फ्रारेड और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर की सहायता से ये ड्रोन अपने लक्ष्य की पहचान कर के उसका काम तमाम कर पाएंगे|

कई अन्य देश भी लगे हैं ऐसे ड्रोन के निर्माण में

भारत के अलावा अमेरिका, चीन, रुस और कुछ यूरोपीय देश भी ऐसे ड्रोन्स तैयार करने की जुगत में लगे हैं। अभी तक कोई भी देश पूर्णतया अपने इस लक्ष्य में कामयाब नहीं हो पाया है।

स्वार्म ड्रोन्स भारत सरकार के कॉम्बेट एयर टीमिंग सिस्टम प्रोजेक्ट (CATS) का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट के तहत स्वार्म ड्रोन के साथ ही इनकी लॉन्चिंग के लिए एक रोबोटिक विंगमैन भी डेवलेप किया जाएगा। साथ ही CATS प्रोजेक्ट में अल्ट्रा-हाई एल्टीट्यूड ड्रोन्स का भी निर्माण किया जाएगा, जो कि तीन हफ्तों तक हवा में रहते हुए रियल टाइम इमेज और वीडियो भेज सकेंगे।

क्या खासियत होगी स्वार्म ड्रोन की

बैटरी चालित ये ड्रोन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ने में सक्षम होंगे और कई घंटे तक बिना रुकावट ये उड़ सकेंगे| इसके पहले प्रोटोटाइप का परीक्षण HAL द्वारा ही बनाये जा रहे हॉक, एडवांस्ड जेट ट्रेनर्स पर लगाया जायेगा| परीक्षण के उपरांत इन्हें किसी भी विमान पर लगाया जा सकेगा।

बिना किसी पायलट के उड़ने वाले ये ड्रोन झुण्ड में दुश्मन पर हमला करेंगे| ये न सिर्फ दुश्मन का पता लगा कर उन्हें मार गिरा सकेंगे बल्कि दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को धत्ता बताकर अपने काम को अंजाम दे सकेंगे| इस ड्रोन की सहायता से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, दुश्मन के एयरक्राफ्ट और राडार सिस्टम को तबाह किया जा सकेगा|

इस ड्रोन का निर्माण प्रधानमंत्री मोदी की मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत किया जा रहा है| इसमें लगने वाली अधिकतर तकनीक और कॉम्पोनेन्ट देश में ही विकसित किये जा रहे हैं|

 


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •