बड़े दिल वाले हमारे प्रधानसेवक

न जाने किसकी दुआओं का फैज़ है मुझ पर,

मैं डूबता हूँ ओर दरिया उछाल देता है…!!

 

ये लाइन हमारे प्रधानसेवक मोदी पर बिलकुल सटीक बैठती है.. अगर आप पीएम मोदी के सियासी जिंदगी पर नजर डाले तो आपको याकिन हो जायेगा कि हम बिलकुल ठीक कह रहे है।

देश के प्रधानसेवक के रूप मे उनका कार्यकाल हो या फिर गुजरात के सीएम के पद पर रहते हुए जो वक्त उन्होने बिताया हो अगर आप नमो को जानने की कोशिश करेंगे, तो आप के सामने एक ऐसी तस्वीर उभर के आयेगी जिसमें सिर्फ सादगी और देश की जनता के लिये समर्पित शख्स़ आप को देखने को मिलेगा । पद मे रहते हुए भी वो एक आम भारतीय की तरह ही देशवासियों से मिलते हुए नजर आयेगे। यानी की वो जिस तरह का जीवन जी रहे है अगर आप उसपर शोध करे तो आप को एक फकीरी देखेगी। लेकिन जब पीएम से इस बाबत पूछा जाता है तो वो साफ कहते है कि जिस गरीबी के अभाव मे उन्होने जीवन जीया है ऐसे मे अब उन्हे किसी भी बात का या पद का प्रभाव नही पड़ता है। तभी तो पीएम देश के ऐसे नेता है जिन्हे अभी तक जो भी तोहफे मिले है या फिर पुरस्कारमें जो भी रकम मिली है उसे किसी न किसी देशहित के काम मे दान मे दिया है।

 

सियोल शांति पुरस्कार मे मिली रकम को किया नमामि गंगे को दान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सियोल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने यह पुरस्कार भारत के लोगों को समर्पित किया और इसकी धनराशि को नमामि गंगे फंड में दान कर दिया।पुरस्कार ग्रहण करने के बाद आभार व्यक्त करते हुए मोदी ने कहा“मेरा मानना है कि यह पुरस्कार मेरा नहीं, बल्कि भारत के लोगों का है। यह 1.3 अरब भारतीयों की शक्ति व कौशल से पांच सालों से कम समय में हासिल की गई भारत की सफलता का है व उनकी तरफ से मैं इसे विनम्रता से स्वीकार करता हूं और आभार व्यक्त करता हूँ।“

अपनी कमाई का 21 लाख रु कुंभ के सफाई कर्मियों को कर दिए दान

इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी निजी बचत से 21 लाख रुपये कुंभ मेले से जुड़े़ सफाईकर्मियों के कल्याण संबंधी कोष में दान दिए। आप ने खुद देखा होगा कि पीएम ने इससे पहले खुद सफाईकर्मियों का चरण वदंन भी किया था. इससे पता चलता है कि आखिर पीएम इन लोगों को दिल से इज्जत करते है।

इस तरह के काम पीएम कोई आज नही कर रहे किर आप सोचे कि शायद चुनाव के चलते वो लोकप्रियता बटोरने के लिये कर रहे हो. इससे पहले साल 2015 मे भी पीएम मोदी ने उन्हे मिले तोहफे की नीलामी करके 8.33 करोड रूपये नमामि गंगे योजना को दान मे दिया था।

इसी तरह का एक किस्सा उस वक्त का भी है जब मोदी गुजरात से दिल्ली पीएम पद की शपथ लेने का रहे थे तब उन्होने अपनी निजी कमाई से भी 21 लाख रूपये अपने कर्मचारियों को दान मे दिया था। इतना ही नही गुजरात के सीएम रहते हुए सचिवालय मे काम करने वाले ड्राइवर और दूसरे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की बच्चियों के शिक्षा के लिए एक फंड बनाया था और उसमे खुद के मिले तोहफे को नीलाम करके 89.96 करोड़ रूपये दान पर दिये थे। यानि कि एक हिसाब लगाया जाये तो करीब 100 करोड़ रूपये से ज्यादा देश के सच्चे सपूत और हम सब के प्रधानसेवक ने देश हित के लिये जनहित मे दिये है। ऐसे पीएम के लिये तो एक शायरी तो बनती ही है। जो ये है

जानिबे मंजिल और ग़ालिब तेरा घराना , क्या जरूरत है फकीरी में पैसा कमाना !