महिला सुरक्षा: सरकार का प्रत्येक पुलिस स्टेशन में महिला हेल्प डेस्क बनाने का फैसला

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Government's decision to set up a women's help desk in every police station

देश में महिलाओं के प्रति बढती अपराध के घटनाओं को देखते हुए केंद्र कि मोदी सरकार ने देश के सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क बनाने का फैसला लिया है।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में एक के बाद एक महिलाओं के साथ अपराध की घटना सामने आ रही हैं। पूरे देश में इन घटनाओं के कारण रोष व्याप्त है। और इसको लेकर कई राज्योंद में विरोध-प्रदर्शन भी हो रहे हैं। सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों में सबसे ज्या्दा संख्यां महिलाओं की है जो सरकार से खुद को सुरक्षा मुहैया कराए जाने की गुहार लगा रही हैं। इन सबके मद्देनजर केंद्र सरकार ने यह महत्वापूर्ण फैसला लिया है।

गृह मंत्रालय ने पुलिस स्टेशनों में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना/सुदृढ़ीकरण के लिए निर्भया फंड के अंतर्गत रु. 100 करोड़ आवंटित किया है। गृहमंत्रालय के मुताबिक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सूबे के सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क बनाने को कहा गया है। और जिन राज्यों के थानों में पहले से महिला हेल्प डेस्क है, उनको और मजबूत बनाया जाएगा।

महिला हेल्प डेस्क का उद्देश्य है पुलिस स्टेशन को महिलाओं के लिए अनुकूल और भरोसेमंद बनाना। महिला हेल्प डेस्क किसी भी महिला के लिए थाने में संपर्क का पहला और एकल बिंदु होगा। डेस्क में मूलतः महिला पुलिस अधिकारी को तैनात किया जाएगा।

अधिकारियों को पुलिस स्टेशन में महिलाओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार हेतु प्रशिक्षित किया जाएगा। डेस्क में वकीलों, मनोवैज्ञानिकों, गैर-सरकारी संगठनों जैसे विशेषज्ञों के पैनल की जानकारी उपलब्ध होगी जो कानूनी सलाह, आश्रय, पुनर्वास इत्यादि से संबंधित सहायता प्रदान कर सकते हैं।

यह योजना सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होगी। सरकार का मानना है कि महिला हेल्पडेस्क बनने के बाद थानों में महिलाओं को काफी मदद मिलेगी। सरकार की कोशिश है कि इसके निर्माण से एक ऐसा वातावरण बने जिससे महिलाओं को पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज कराने में कोई झिझक न रहे। आपको बता दें कि 2012 दिल्लीा गैंगरेप और मर्डर की घटना के बाद सरकार ने 2013 में निर्भया फंड की स्थाापना की थी। दिल्ली में हुए इस शर्मनाक हादसे के बाद पूरे देश में आक्रोश की ज्वांला धधक उठी थी।

 


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