सरकार का रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए 50 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार रेल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण की योजना पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सरकार ने पिछले 5 साल में रेलवे का कायाकल्प कर दिया है। चाहे रेलवे में इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की बात हो, रेल लाइनों का विद्युतीकरण हो, रेल पटरियों का विस्तार हो या फिर रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्री सुविधाओं का आधुनिकीकरण, हर स्तर पर व्यापक कार्य हुआ है।

रेलवे अगले बारह वर्ष में पचास लाख करोड़ रूपये के निवेश पर विचार कर रहा है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में कहा कि संयुक्त उपक्रमों के इस निवेश से रेलवे का आधुनिकीकरण, साजोसामान की लागत में कमी, माल ढुलाई में वृद्धि और रेल यात्रा विश्वेस्तधरीय बनायी जाएगी। श्री गोयल के पास वाणिज्य मंत्रालय का प्रभार भी है। उन्होंने कहा कि सरकार गैर बैंकिंग वित्ती्य कम्पनी और रियल स्टे‍ट सेक्टर को ऋण देने में बैंको को सहयोग देने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को बदलाव की दिशा में साथ मिलकर काम करना होगा।

आइयें एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में रेलवे का आधुनिकीकरण तेज़ी से बढ़ रहा है:

स्टेशनों के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया लगातार जारी

Valsad Railway station

आदर्श स्टेशन योजना के तहत देश भर के 1253 स्टेशनों में से अब तक 1103 स्टेशन विकसित किए जा चुके हैं। और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण की यह प्रक्रिया लगातार जारी है। इसके लिए समय-समय पर कई योजनाएं स्कीम भी लाई जाती हैं। स्टेशनों के विकास के लिए मॉडर्न स्टेशन स्कीम और आदर्श स्टेशन स्कीम जैसी योजनाएं लॉन्च हो चुकी हैं।

स्टेशनों के सुधार के लिए स्टेशन रीडेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत एक अलग योजना भी बनाई गई है। इसमें गांधीनगर (गुजरात) और हबीबगंज (मध्य प्रदेश) स्टेशन के पुनर्विकास का काम किया गया है। चारबाग (लखनऊ, उत्तर प्रदेश) और पुड्डुचेरी स्टेशनों के रीडेवलपमेंट के लिए कॉन्ट्रैक्ट दे दिए गए हैं।

मोदी सरकार 2.0 में रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा ‘गिव इट अप’ योजना भी शुरू किया गया है। इसके तहत लोगों को रेल टिकट पर सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कई वरिष्ठ नागरिकों ने सब्सिडी छोड़ भी दी है।

रेलवे ने रचा इतिहास, एक साल में बने 6,713 कोच और इंजन

वडोदरा में भारत का पहला राष्ट्रीय रेल और परिवहन विश्वविद्यालय खुला है। कर्मचारी सशक्तिकरण से लेकर कौशल बढ़ाने के नए अवसरों पर ध्या न केंद्रित करते हुए रेलवे अपने कार्यबल में एक नई ऊर्जा भर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रेलवे भारत की जीवन रेखा बन जाए और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ताकत दें।

इसी कड़ी में रेलवे को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। रेलवे ने वित्त वर्ष 2018-19 में रिकॉर्ड 6,713 कोच, इंजनों का निर्माण किया है। चेन्नई स्थित भारतीय रेलवे की इंटिग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने मार्च 2019 में चीन की राष्ट्रीय निर्माता को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की सबसे बड़ी कोच निर्माता के रूप में उभरी है। चीन सालाना तौर पर 2600 कोच बनाता है। आईसीएफ ने ना केवल रिकॉर्ड संख्या में कोच का निर्माण किया, बल्कि ट्रेन 18 – वंदे भारत एक्सप्रेस का भी निर्माण किया है।

2022 तक रेलवे ट्रैक का सौ फीसदी विद्युतीकरण का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार भारतीय रेलवे का कायापलट करने के मिशन में लगी है। बीते पांच वर्षों में रेल यात्रा को सुगम बनाने और रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए कई कदम उठाए गए हैं। मोदी सरकार ने रेलवे में आधारभूत ढांचे के निर्माण को जितना काम किया है, उतना कार्य पहले कभी नहीं हुआ। अब मोदी सरकार ने रेलवे ट्रैक का सौ फीसदी विद्युतीकरण करने का फैसला किया है। केंद्रीय कैबिनेट ने रेलवे ट्रैक के सौ फीसदी विद्युतीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद 2022 तक देश की सभी ब्रॉड गेज रेल लाइनों का विद्युतीकरण किया जाएगा।

स्टेशनो का सौन्दर्यीकरण

सौन्दर्यीकरण पर बल देते हुए भारतीय रेलवे के कई स्टेशनो को सुसज्जित किया गया है। सौन्दर्यीकरण किये गए स्टेशनो पर कई तरह की सुविधाएं दी गयी है। जैसे, LED लाइट, लिफ्ट, एस्केलेटर्स। रिवैम्प हुए स्टेशनो में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, जयपुर जंक्शन, लोनावला स्टेशन और हरिद्वार स्टेशन शामिल है। इसके अलावा IRCTC ने अपनी वेबसाइट को रिवैम्प करते हुए बहुत से नए फीचर उसमें जोड़े है। जिसमे वेटिंग लिस्ट्स देखने समेत कई अन्य विकल्प मौजूद है।