10 करोड़ भारतीयों को आयुष्मान कार्ड बांटने की तैयारी में जुटी सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने तीन दिन पहले लाल किले से आधा दर्जन सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच जाने की बात कही थी। इसके बाद अब नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने भी आयुष्मान भारत योजना के विस्तार के लिए तैयारी कर ली है। जून में स्वास्थ्य मंत्री का पद संभालने के बाद से ही मनसुख मंडाविया लगातार अधिकारियों पर पीएम के विजन के तहत देश के 50 करोड़ लाभार्थियों को 5 लाख रुपये का मुफ्त बीमा मुहैया कराने के लिए कह रहे हैं।

10 करोड़ तक आयुष्मान कार्ड पहुंचाने का सरकार ने रखा लक्ष्य

सरकार की माने तो देश में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ आयुष्मान भारत कार्ड्स वितरित करने और एक तिमाही में 50 लाख लोगों को अस्पताल में मुफ्त भर्ती का लाभ देना है। यह लक्ष्य बड़ा है, क्योंकि अब तक 12 करोड़ लाभर्थियों को आयुष्मान भारत कार्ड्स वितरित करने में सरकार को तीन साल लग गए। बीते साल के अंत तक और 2021 में तीन महीनों का अभियान शुरू होने से पहले केवल 7.87 करोड़ आयुष्मान भारत कार्ड्स वितरित किए गए अभी भी यह रास्ता बहुत लंबा है, क्योंकि इकोनॉमिक सेंसस 2011 के आधार पर संभावित लाभार्थियों की संख्या 53 करोड़ है।  लेकिन इसके बावजूद सरकार ने इस वित्तीय वर्ष  में एक बड़ा अभियान शुरू कर कुल 10 करोड़ लाभार्थियों को कार्ड बांटने की योजना बना रहा है। इसके बाद अगले साल मार्च तक वितरित किए हुए कार्ड्स की संख्या 19 करोड़ तक पहुंच सकती है।

लालकिले से पीएम मोदी ने जल्द लोगों तक पहुंचे सुविधा, इसका किया  ऐलान

स्वतंत्रता दिवस पर दिए अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश के हर गरीब को उज्जवला से लेकर आयुष्मान भारत तक की अहमियत पता है। उन्होंने कहा, ‘आज सरकारी योजनाओं की रफ्तार बढ़ी है और वे अपने लक्ष्यों को हासिल कर रही हैं। हमने पहले से ज्यादा तेजी से प्रगति की है, लेकिन यह यहां खत्म नहीं होगा। हमें परिपूर्णता हासिल करनी है। सभी गांवों में सड़कें होनी चाहिए, सभी घरों के बैंक खाते होने चाहिए, सभी लाभार्थियों के पास आयुष्मान भारत कार्ड होने चाहिए और सभी पात्र व्यक्तियों को उज्जवला योजना का लाभ मिलना चाहिए और गैस कनेक्शन होना चाहिए।’

जिसके बाद स्वास्थ मंत्रालय ने ये लक्ष्य अपने लिए तैयार किया है और ये तो सब जानते हैं कि लालकिले से पीएम के ऐलान के बाद उसे पूरा करने के लिये मंत्रालय के साथ-साथ एक-एक अधिकारी जोश के साथ जुट जाता है जिसका उदाहरण जनधन योजना के तहत देखा भी गया है। ऐसे में इस लक्ष्य को अब पाना कोई बड़ी बात नहीं होगी।