राजकोषीय घाटा को कम करने के लिए सरकार का विभागों से खर्च कम करने का फरमान

वैसे ये तो सब जानते हैं कि देश के पीएम मोदी जी को फिजूल खर्ची बिलकुल भी पंसद नहीं है उनका विदेश दौरा हो या फिर देश में ही कोई काम वो कम से कम खर्च में उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं। खासकर आजकल जब कोरोना काल के चलते देश के खजाने पर ज्यादा भार पड़ रहा है और राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है, इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों से खर्च पर अंकुश लगाने को कहा है।

सरकार अपने खर्चों को करेगी कम

सरकार की माने तो कोरोना आपदा के इस दौर में जितना खर्च कम हो तो वो जनता के काम आ सकता है, वित्त मंत्रालय ने ऑफिस मेमोरेंडम में फिजूलखर्च रोकने के लिए कदम उठाने और इसमें 20 फीसदी की कमी करने को कहा है। मेंमोरेंडम में जिन चीजों में खर्च में कमी करने के लिए कहा गया है, उनमें ओवरटाइम भत्ता, रिवार्ड्स, घरेलू यात्रा, विदेश यात्रा खर्च, ऑफिस खर्च, किराए, रेट्स और टैक्स, रॉयल्टी, प्रकाशन, अन्य प्रशासनिक खर्च, आपूर्ति और सामग्री, राशन की लागत, POL, वस्त्र और टेंटेज, विज्ञापन और प्रचार, लघु कार्य, रख रखाव, सेवा शुल्क, योगदान और अन्य शुल्क शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि यह कटौती करने का यह सही समय है क्योंकि इस समय सिस्टम 100 फीसदी क्षमता पर काम नहीं कर रहा है।

सरकार कर चुकी है फ्री वैक्सीन और अनाज देने की बात

देशभर में 21 जून से मेगा वैक्सीन कार्यक्रम का ऐलान खुद मोदी जी ने किया है जिसके तहत सरकार देश भर में मुफ्त वैक्सीन लगायेगी तो 80 करोड़ लोगो को मुफ्त में अनाज भी देगी। ऐसे में सरकार के राजकोष में इसका असर भी पड़ना साफ है। सरकार की माने तो इस घोषणा के बाद वैक्सीन खरीदने पर सरकार का खर्च 50 हजार करोड़ रुपये तक जा सकता है। केंद्र ने इसके लिए बजट में 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। साथ ही 80 करोड़ लोगों के लिए मुफ्त खाद्यान्न योजना को नवंबर तक बढ़ाए जाने से सरकार पर 1 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इस तरह वैक्सीनेशन और मुफ्त खाद्यान्न योजना से सरकार पर करीब 1.15 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे राजकोषीय घाटा बढ़ सकता है। सरकार ने इस वित्त वर्ष में इसे जीडीपी का 6.8 फीसदी रखने का लक्ष्य रखा है।

इस घाटे को कम करने के लिये ही अब सरकार दूसरी तरह की रणनीत बनाने में जुट गई है। जिसकी शुरूआत सरकार ने सबसे पहले अपने फिजूल खर्च को कम करके शुरू किया है। वैसे इस आपदा के वक्त सरकार के साथ मिलकर जनता को भी काम करना चाहिये जिसके चलते हम सबको ये प्रण लेना चाहिये कि वो वैक्सीन की बर्बादी कम से कम हो इसलिये ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन लगवाने में सरकार की मदद करेंगे, जिससे सरकार का वैक्सीन खरीदने में कम घाटा हो और कम खर्च में ज्यादा लोगो को वैक्सीन लग सके।