13वें कॉप सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी – सरकार पर्यावरण को क्षति पहुंचाये बिना विकास सुनिश्चित कर रही है

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प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण को लेकर 13वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार का सतत विकास में दृढ़ विश्वास रखते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास सुनिश्चित कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत कुछ उन देशों में से एक है जो पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों के अनुरूप चल रहे हैं। पेरिस समझौते के अनुसार तापमान में बढ़ोत्तरी दो डिग्री सेल्सियस से कम रखने का लक्ष्य तय किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के गांधी नगर में वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर संधि में शामिल पक्षों के 13वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत पर्यावरण संरक्षण, सतत जीवन शैली और हरित विकास मॉडल के आधार पर जलवायु परिवर्तन की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन की थीम – धरती को जोड़ने वाली प्रवासी प्रजातियों का स्वागत से भी यह प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। प्रधानमंत्री ने वन्य जीवों के संरक्षण के लिए एकजुट सहयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि 2019 में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 870 हो गई है, जबकि 2014 में यह 714 थी। उन्होंने कहा कि वन्य जीवों का संरक्षण भारत के सांस्कृति मूल्यों में शामिल रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व के सर्वाधिक विविधता वाले देशों में एक है। भारत विश्व के कुल क्षेत्र के दो दशमलव चार प्रतिशत में वैश्विक जैव विविधता का लगभग आठ प्रतिशत साझा करता है।

प्रधानमंत्री ने भारत के वन क्षेत्रों में वृद्धि का उल्ले्ख करते हुए कहा कि यह वर्तमान में देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.67 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि किस तरह से भारत संरक्षण, सतत जीवन शैली और हरित विकास के मॉडल के माध्यम से “जलवायु परिवर्तन” की समस्या से निपटने की दिशा में सबसे आगे बढ़कर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत के कई संरक्षित क्षेत्र पड़ोसी देशों के संरक्षित क्षेत्रों के साथ सीमाएं साझा करते हैं। ऐसे में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्री य सरंक्षित क्षेत्र बनाए जाने की दिशा में प्रयास काफी सकारात्म्क होंगे। सतत विकास के बारे में सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने सरकार द्वारा पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अनुकूल संरचना विकास की नीति दिशा-निर्देश जारी करने का हवाला दिया।

 


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