वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ाने के लिये विदेशी कंपनियों को सरकार ने दी छूट

कोरोना वैक्सीनेशन की रफ्तार देश में तेजी से बढ़े इसको लेकर अमेरिकी कंपनी फाइजर और मॉडर्ना को लेकर सरकार बड़ी छूट देने को राजी हो गई है। इसके साथ ही इन दोनों वैक्सीन के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है। कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल से जुड़े किसी भी दावे से कानूनी सुरक्षा की मांग को लेकर अब अमेरिकी कंपनी फाइजर और सरकार के बीच बात बन गई है जिसके बाद  सरकार इस बात पर राजी हो गई है कि साइड इफेक्ट पर कंपनी को जुर्माना नहीं देना पड़ेगा।

फाइजर और मॉडर्ना के भारत आने का रास्ता साफ

देश में वैक्सीनेसन की रफ्तार को और तेज करने के लिये लगातार भारत सरकार कदम उठा रही है। इसी क्रम में सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है जिसके बाद देश में फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन का रास्ता और आसान हो गया है सरकार की माने तो साइड इफेक्ट पर कंपनी को कानूनी कार्यवाही नहीं होगी। सरकार की ओर से कहा गया कि वह 2020 के मध्य से ही फाइजर और मॉडेर्ना से टीका आयात पर बातचीत कर रही है। सरकार ने इसके साथ ही बड़ी विदेशी टीका निर्माता कंपनियों को स्थानीय स्तर पर परीक्षण की जरूरत से छूट भी दी है जिसके बाद ये दोनो टीके अब भारत आ सकेगे जिससे वैक्सीन की रफ्तार में तेजी देखी जा सकती है।

कोवैक्सिन के उत्पादन के लिए दिए 159 करोड़

देश में कोरोना संक्रमण के प्रसार पर रोक लगाने के लिए वैक्सीनेशन ड्राइव  में तेजी लाने को लेकर भारत सरकार की ओर से कई प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने कोवैक्सिन  का बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन करने के लिए मुंबई स्थित हाफकाइन बायो-फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड को कुल 159 करोड़ रुपये का अनुदान आवंटित किया है। इनमें से केंद्र सरकार ने 65 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र सरकार से 94 करोड़ रुपये का अनुदान आवंटित किया है। हाफकाइन को एक साल में कोवैक्सिन की 22.8 करोड़ डोज का उत्पादन करने का प्रस्ताव दिया गया है। यह उत्पादन मुंबई में कंपनी के परेल कॉम्प्लेक्स में किया जाएगा।

उधर सरकार की माने तो जुलाई के अंत या अगस्त की शुरूआत तक 1 करोड़ लोगो को हर रोज वैक्सीन लगाने की रणनीति केंद्र सरकार बना रही है जिससे कोरोना से जंग जीती जा सके। ऐसे में वैक्सीनेशन की जरूर बहुत होगी जिसके लिये सरकार अभी से तैयारी करने में लगे है।

 

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