सरकार का ऐलान: दिवाली से पहले कैंप लगाकर 200 जिलों में बांटे जाएंगे लोन

loans will be distributed in 200 districts by organizing camps

केंद्र सरकार ने गुरुवार को अर्थव्यवस्था में सुधार के मद्देनज़र त्योहारों के दौरान ज्यादा से ज्यादा कर्ज देने के लिए अगले एक माह में दो अलग अलग चरणों में कुल 400 जिलों में लोन मेले का आयोजन करेगी । इसका मकसद मकान खरीदारों और किसानों समेत कर्ज चाहने वालों को ऋण सुलभ कराना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद यह घोषणा की।

वित्त मंत्री ने कहा कि बैंक लोन देने के इरादे से 3 से 7 अक्टूबर के बीच 200 जिलों में एनबीएफसी और खुदरा कर्जदारों के लिए कैंप लगाएंगे। सरकार ने इस मुहिम को बैंक लोन मेला नाम दिया है। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि 11 अक्टूबर के बाद भी लोन मेले का आयोजन किया जाएगा।

दिवाली का समय पुरे देश में खरीदारी का सबसे अच्छा समय माना जाता है। और सरकार की यही सोच है की त्योहारों के दौरान ज्यादा से ज्यादा कर्ज देना सुनिश्चित हो सके। सरकार ने बताया कि लोन मेले का आयोजन के लिए जिलों का चुनाव बैंक खुद करेंगे और जल्द ही इनकी सूची जारी कर दी जाएगी। इन कैम्पों में कारोबारी जरूरत, कृषि, घर और गाड़ी खरीदने जैसे चीजों के लिए कर्ज दिया जाएगा। ये कर्ज बैंकों और एनबीएफसी के जरिए दिए जाएंगे। यही नहीं जिन जिलों में कर्ज का वितरण होगा वहां के सांसद और कई जगहों पर केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री भी मौजूद रहेंगे। वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर इस बार को सुनिश्चित करेंगे कि कर्ज के लिए लगाए गए कैम्प में सरकार के प्रतिनिधि या सांसद जरूर मौजूद रहें। इस कर्ज के जरिए सरकार बैकों के जरिए सिस्टम में तरलता बढ़ाना चाहती है। साथ ही जरूरतमंद लोगों के हाथ में रकम पहुंचाकर सिस्टम में मांग भी पैदा करना चाहती है।

इसके अलावा बैंकों के विलय के सवाल पर सीतारमण ने कहा कि नियम के मुताबिक काम तेजी से चल रहा है और बैंक रिफॉर्म्स के बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

सरकार ने छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए बैंकों से कहा कि वे 31 मार्च, 2020 तक सूक्ष्म, लघु और मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) के दबाव वाले कर्ज को गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) घोषित नहीं करें।

गौरतलब है कि मंदी की आहट के बीच मोदी सरकार की ओर से लगातार बड़ी घोषणाएं की जा रही हैं। खुद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने के लिए कई बड़ी घोषणाएं कर चुकी हैं और आने वाले दिनों में अगर जरूरत पड़ी तो और घोषणाएं की जाएंगी।