आर्थिक मोर्च पर अच्छी खबर, बैंकों का ग्रॉस NPA मार्च 2020 तक घट कर हो सकता है 9%

RBI

बकाये ऋण की वसूली बढ़ने तथा नए एनपीए में कमी आने की वजह से देश में बैंकों की सकल गैर निष्पाादित परिसंपत्ति(एनपीए) चालू वित्त वर्ष के अंत तक ( मार्च 2020 ) कम होकर 9 प्रतिशत पर आ सकती है। एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कॉरपोरेशन (NBFC) के संकट समेत हालिया झटकों के बावजूद देश की वित्तीय प्रणाली “मजबूत बनी” हुई है और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में तेजी से गिरावट आई है। फंसी परिसंपत्ति गिरकर 9.3 प्रतिशत रह गई। रिजर्व बैंक ने गुरुवार को वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा कि NPA का “कायापलट” हुआ है। बैंकों का एनपीए मार्च 2019 में घटकर 9.3 प्रतिशत पर आ गया। एक साल पहले इसी समय यह 11.2 प्रतिशत पर था। कर्ज बिगड़ने के नए मामलों में कमी के साथ-साथ मौजूदा एनपीए खातों में वसूली में वृद्धि से ऐसा संभव हो सका है।

रिजर्व बैंक का अनुमान है कि मार्च 2020 तक बैंकों का एनपीए कम होकर नौ प्रतिशत पर आ जाएगा। कुल एनपीए में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 12.6 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर है लेकिन मार्च 2020 तक यह घटकर 12 प्रतिशत पर आ सकती है। रिपोर्ट में एनबीएफसी संकट की ओर इशारा करते हुए कहा गया है कि ” हालिया झटकों के बावजूद देश की वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी बैंकों का प्रावधान कवरेज अनुपात में सुधार के साथ बैंकों के उतार – चढ़ाव झेलने की क्षमता बढ़ी है। सभी बैंकों का प्रावधान कवरेज अनुपात सितंबर 2018 में 52.4 प्रतिशत से मार्च 2019 में 60.6 प्रतिशत रहा, मार्च में यह 48.3 प्रतिशत पर था।