मोदी सरकार के लिये अच्छी खबर, पटरी पर लौटती देश की अर्थव्यवस्था

मार्च के महीने से कोरोना ने देश में अपना पांव पसारना शुरू किया था जिसे रोकने के लिये सरकार को देशभर में लॉकडाउन लगाना पड़ा था जिसके चलते आर्थिक सेक्टर की रफ्तार सुस्त हो गई थी, पर अब आर्थिक सेक्टर से कुछ ऐसी खबर आ रही है जो मोदी सरकार को राहत देने वाली है।


GST  संग्रह में आई उछाल

करीब 8 महीने के बाद GST को लेकर शुभ समाचार आया है जो केंद्र सरकार के लिये काफी मायने रखता है। अक्टूबर में जीएसटी संग्रह 1.05 लाख करोड़ से अधिक रहा है, फ़रवरी के बाद से पहली बार संग्रह का आकंडा 1 लाख करोड़ के पार गया है। कोरोना की वजह से लागू किए गए लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधि रुकने से GST संग्रह 1 लाख करोड़ के आंकड़े से कम हो गया। इतना ही इस महीने के लिए राजस्व पिछले साल के इसी महीने में जीएसटी राजस्व से 10% अधिक है। इसके अलावा माल के आयात से राजस्व 9% अधिक और घरेलू लेनदेन यानी सेवाओं के आयात सहित से राजस्व 11% अधिक रहा है। ये ऑकड़े बताते है कि जिस तरह से मोदी सरकार कदम बढ़ा रही है वो ठीक दिशा में जा रहे है।

बिजली खपत में बढ़ोतरी

बिजली की खपत में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत मिलते हैं, और सितंबर महीने में बिजली की खपत में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश की कुल बिजली खपत सितंबर में 5.6 फीसदी बढ़कर 113.54 अरब यूनिट्स रही इसके पहले लगातार 6 महीने तक बिजली की कुल खपत में गिरावट दर्ज की गई थी। बिजली की खपत में बढ़ोतरी होने का मतलब यह है कि कोरोना महामारी के बीच अब औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी लौट आई हैं। बिजली मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक पिछले साल सितंबर में 107.51 अरब यूनिट बिजली की खपत हुई थी। ऑकड़े बताते है कि बिजली खपत में अप्रैल में 23.2 फीसदी, मई में 14.9 फीसदी, जून में 10.9 फीसदी, जुलाई में 3.7 फीसदी और अगस्त में 1.7 फीसदी गिरी थी। लेकिन अब जो ऑकड़े आये है उससे ये साफ हो रहा है कि देश के कल कारखाने फिर से रफ्तार पकड़ रहे है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में दिखने लगी रफ्तार

देश के लिये एक शुभ समाचार ये भी है कि कोरोना काल से अब देश का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी बाहर आने लगा है। PMI के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां साढ़े आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं। देश में मैन्युफैक्चरिंग की गतिविधियों में सितंबर में लगातार दूसरे महीने सुधार हुआ है। जो आत्मनिर्भर भारत के सपने को सच करने के लिये एक शुभ संकेत है।

रोजगार में दिखने लगा बूम

रोजगार के मोर्चे पर भी सितंबर में थोड़ी स्थिति सुधरी है, जिससे अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। सितंबर के आखिरी हफ्ते तक राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर घटकर 6.7 फीसदी पर आ गई है। अगस्त महीने में 8.3 फीसदी दर्ज की गई थी, जबकि जुलाई में बेरोजगारी दर 7.4 फीसदी थी। इस लिहाज से सितंबर महीने के अंत में बेरोजगारी दर के 6.7 फीसदी पर आने को अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी के आंकड़ों के मुताबिक 29 सितंबर देश के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 8.5 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 5.8 फीसदी दर्ज की गई जो सरकार के लिए राहत की खबर है क्योकि रोजगार बढ़ने का मतलब है कि देश में अर्थव्यवस्था ठीक दिशा में बढ़ रही है।

जिस तरह के ऑकड़े आ रहे है उससे साफ हो रहा है कि मोदी सरकार ने पहले तो लोगों की जान बचाई लॉकडाउन लगाकर लेकिन अब जहान को बचाने के लिये सरकारी योजनाओं का असर है कि बंद पड़ा करोबार का पहिया फिर से दौड़ने लगा है।