Lockdown में साफ हुई गंगा तो 50 साल बाद दिखा बदलाव, नदी में लौटीं 7 प्रजाति की मछलियां

वाराणसी. कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते पूरे देश में लॉकडाउन (Lockdown) घोषित है. दूसरी तरफ कोरोना काल में घर से रूठ कर चलीं गईं मछलियों की सात प्रजातियां भी घर लौट आई हैं. काशी में मां गंगा की गोद में फिर पूरे परिवार के साथ ये मछलियां (Fish) खेलने लगी हैं. जी हां, COVID-19 के संक्रमण के चलते करीब दो महीने वाराणसी (Varanasi) में भी लॉकडाउन रहा. इस दौरान गंगा में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा बढ़ गई है. जनता कर्फ्यू से लेकर अगले 40 दिनों तक गंगा में औसतन घुलनशील आक्सीजन की मात्रा नौ और दस के करीब रही. किसी किसी दिन ये 11 और 12 तक भी पहुंची. यही नहीं गंगा के रंग मे भी 50 साल बाद इतना सुधार दिखा है.

इस दौरान फैक्टियां बंद होने से केमिकल जहां गंगा में नहीं गिरा, वहीं साड़ियों के रंगाई से जुड़े केमिकल भी गंगा से दूर रहे. इसी का परिणाम हैं कि काशी की गंगा को छोड़कर चली गईं मछली की सात प्रजातियां एक बार फिर लौट कर आ गई हैं. क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डाॅ. कालिका सिंह बताते हैं कि ये बेहद चौंकाने जैसा है कि मछलियों की वो सात प्रजातियां जो किसी जमाने में काशी की गंगा में दिखाई देती थीं. लेकिन प्रदूषण के कारण दिखना बंद हो गई, वो फिर से लौट आई हैं.

इन सात नस्लों में करौंछी, भाकुरी, सिंघा, बैकरा, घेघरा, नयन और रीठ प्रजाति की मछलियां शामिल हैं. इन सभी मछलियों की अपनी अपनी खासियतें हैं. नाविक गोरखनाथ बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में कभी कभी बरसात के दिनों में रोहू, कतला दिख भी जाती थीं लेकिन झींगा, भाकुरी, सिंघा तो देखे जमाना हो गया था. हर मछली की अपनी विशेषता है. जैसे हिल्सा की खासियत है कि जिस ओर नदी की धारा होती है, वो उसके उल्टे तैरती है. वहीं झींगा हमेशा साफ पानी में ही दिखेगी. खास बात ये है कि बड़ी मछलियों के साथ छोटी मछलियां भी दिख रही हैं. जिससे उम्मीद लगाई जा रही है कि मछलियों के लिए इस वक्त पानी अनूकूल है और प्रजनन के जरिए वो यहां अपना परिवार बढ़ा रही हैं.

Originally published: News 18