‘दोस्‍त’ रूस ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दिया भरोसा, पाकिस्‍तान को नहीं देंगे हथियार

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हाइलाइट्स:

  • राजनाथ सिंह को मास्‍को ने भरोसा दिया है कि वह पाकिस्‍तान को हथियार नहीं देगा
  • इससे पहले रूस ने पाकिस्‍तान को हेलिकॉप्‍टर दिए थे जिसका भारत ने व‍िरोध किया था
  • इससे पहले रूस ने पाकिस्‍तान को हेलिकॉप्‍टर दिए थे जिसका भारत ने व‍िरोध किया था

मास्‍को

रूस के दौरे पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को मास्‍को ने भरोसा दिया है कि वह पाकिस्‍तान को हथियार नहीं देगा। इससे पहले रूस ने पाकिस्‍तान को आधा दर्जन हेलिकॉप्‍टर दिए थे जिसका भारत ने व‍िरोध किया था। इसके बाद रूस ने इन हेलिकॉप्‍टर्स की सप्‍लाइ को रोक दिया था। रूस ने यह आश्‍वासन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ गुरुवार शाम को बैठक के दौरान दिया।

रूस भारत को सबसे ज्‍यादा हथियारों की आपूर्ति करने वाला देश है। इसमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाली सबमरीन शामिल है। रूस ने यह भी कहा है कि वह भारत की व्‍यापक स्‍तर पर सुरक्षा हितों में मदद करेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूस के रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोइगू के बीच बैठक में मास्‍को ने यह आश्‍वासन दिया। बता दें कि भारत को घेरने के लिए पाकिस्‍तान काफी समय से रूस से हथियार खरीदना चाहता है लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई है।

एके-203 रायफल भारत में बनाने के लिये बड़ा समझौता

भारत और रूस के सैनिक जल्‍द ही अंडमान सागर के पास व्‍यापक युद्धाभ्‍यास करने जा रहे हैं। राजनाथ सिंह की यात्रा के दौरान भारत और रूस ने अत्याधुनिक एके-203 रायफल भारत में बनाने के लिये एक बड़े समझौते को अंतिम रूप दे दिया। रूसी मीडिया ने गुरुवार को यह जानकारी दी। एके-203 रायफल, एके-47 रायफल का नवीनतम और सर्वाधिक उन्नत संस्‍करण है। यह ‘इंडियन स्मॉल ऑर्म्स सिस्टम’ (इनसास) 5.56 गुणा 45 मिमी रायफल की जगह लेगा।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी स्पुतनिक के मुताबिक भारतीय थल सेना को लगभग 7,70,000 एके-203 रायफलों की जरूरत है, जिनमें से एक लाख का आयात किया जाएगा और शेष का निर्माण भारत में किया जाएगा। हालांकि, इस समझौते को अंतिम रूप दिये जाने की भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। रूसी समाचार एजेंसी की खबर के मुताबिक इन रायफलों को भारत में संयुक्त उद्यम भारत-रूस रायफल प्राइवेट लिमिटेड (आईआरआरपीएल) के तहत बनाया जाएगा। खबर के मुताबिक प्रति रायफल करीब 1,100 डॉलर की लागत आने की उम्मीद है, जिसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण लागत और विनिर्माण इकाई की स्थापना भी शामिल है।

Originally published: NBT Hindi News


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