फ्रांस के मीडिया की रिपोर्ट, यूपीए के वक्त बिचौलिए को दिया गया था 65 करोड़ रुपये का कमीशन

राफेल का जिन्न एक बार फिर से बोतल से बाहर निकल आया है लेकिन इसबार ये सत्तापक्ष की तकलीफ कम और विपक्ष के लिये परेशानी का सबब ज्यादा बन रहा है। कारण फ्रांस की एक मीडियापार्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांसीसी विमान निर्माता दसॉल्ट ने यूपीए सरकार के वक्त भारत को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की बिक्री को सुरक्षित करने के लिए एक बिचौलिए को 7.5 मिलियन यूरो यानी 65 करोड़ रुपये का कमीशन दिया था।

भुगतान का बड़ा हिस्सा 2013 से पहले किया गया

पोर्टल का कहना है कि दसॉल्ट ने राफेल की बिक्री को सुरक्षित करने के लिए सुशेन गुप्ता को रिश्वत दी थी। इस कथित भुगतान का बड़ा हिस्सा 2013 से पहले किया गया था। इससे जुड़े दस्तावेज भी मौजूद हैं। इसके बावजूद भारतीय पुलिस ने मामले की जांच शुरू नहीं की। फ्रांस का यह ऑनलाइन जर्नल 59,000 करोड़ रुपये के राफेल सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहा है। ‘राफेल पेपर्स’ पर मीडियापार्ट की जांच से जुलाई में फ्रांस की राजनीति में हलचल मच गई थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद इस मामले में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों में न्यायिक जांच शुरू की गई। सुशेन गुप्ता पर अगस्ता वेस्टलैंड से मॉरीशस में रजिस्टर्ड एक शेल कंपनी के जरिए रिश्वत लेने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक, दसॉल्ट ने 2001 में सुशेन गुप्ता को बिचौलिए के तौर पर हायर किया, इसी समय भारत सरकार ने लड़ाकू विमान खरीदने का एलान किया था। हालांकि इसकी प्रक्रिया 2007 में शुरू हुई। गुप्ता अगस्ता वेस्टलैंड डील से भी जुड़ा था।

Atos secures onboard connectivity for Dassault Aviation's Rafale “F4  standard” aircrafts - Atos

राफेल को लेकर बैकफुट में विपक्ष

आमूमन देखा जाता है कि ज्यादा तर आरोप सत्ता पक्ष पर लगते है और उसपर विपक्ष हंगामा करता है लेकिन इस बार उळ्टा हो चुका है। फ्रांस से आई इस खबर से आने वाले दिन भारतीय सियासत में धमाकेदार हो सकते है क्योकि संसद का शीतकाली सत्र इसी महीने के अंत में शुरू होने वाला है और घात लगाकर बैठा विपक्ष सोच रहा था कि वो किसान बिल और दूसरे कई मुद्दो पर सरकार को बैकफुट में रखेगी लेकिन अब तो राफेल कीडील विपक्ष के लिये गले की हड्ड़ी बनती जा रही है जिसे वो ना निगल पा रही है औऱ ना ही उगल पा रही है।

ऐसे में संसद में अगर विपक्ष सरकार को घेरने के लिये जोरदार हमला करेगी तो सत्तापक्ष भी राफेल को लेकर तेजगति से विपक्ष पर हावी होने की कोशिश करेगा। पर इतना तो तय है कि शुरुआत कुछ दिन राफेल के नाम पर फिर संसद के दिन बर्बाद होंगे जिससे नुकसान सिर्फ देश की जनता का होगा। इसलिये विपक्ष को ये सोचना समझना चाहिये।