फरवरी में अब तक एफपीआई ने किया 23,102 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की दूरदर्शी आर्थिक नीतियों की वजह से देश में कारोबारी माहौल अच्छा हुआ है और पूंजी बाजार में देश के ही नहीं, विदेश के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। वैश्विक मंदी के इस दौर में फरवरी महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने घरेलू बाजार में 23,102 करोड़ रुपये विदेशी निवेश किया है।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, तीन फरवरी से 20 फरवरी के दौरान एफपीआई ने इक्विटी में 10,750 करोड़ रुपये और बांड श्रेणी में 12,352 करोड़ रुपये लगाये हैं। इस दौरान आलोच्य अवधि में एफपीआई का कुल निवेश 23,102 करोड़ रुपये रहा। एफपीआई पिछले साल सितंबर से घरेलू बाजार में शुद्ध निवेशक बने हुए हैं।

इसलिए निवेश कर रहे हैं विदेशी निवेशक

मॉर्निंगस्टार इंवेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के वरिष्ठ विश्लेषक प्रबंधक (शोध) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘बजट के बाद बनी सकारात्मक धारणा और रिजर्व बैंक द्वारा हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में उदार रुख बनाये रखने समेत कई कारक हैं, जिन्हें लेकर विदेशी निवेशक घरेलू अर्थव्यवस्था की नरमी तथा कंपनियों के तिमाही परिणामों की धीमी वृद्धि दर के बाद भी घरेलू बाजार में निवेश किये जा रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि बजट में लाभांश वितरण कर हटाने तथा कॉरपोरेट बांड में एफपीआई की सीमा नौ प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने से भी विदेशी निवेशकों का भरोसा बहाल करने में मदद मिली है।

2019 में हुआ 82,575 करोड़ का रिकॉर्ड एफपीआई निवेश

विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के लिए साल 2019 काफी अच्छा रहा है। इस साल देश में 82,575 करोड़ रुपए का एफपीआई निवेश हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत चीन के बाद विदेशी निवेशकों का पसंदीदा स्थान बना हुआ है। इससे साफ़ जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा जीता है। इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, मई 2014 में मोदी कार्यकाल शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने इस साल, 2019 में भारत में सबसे ज्यादा धन लगाया है। हांगकांग में विरोध प्रदर्शनों के चलते भी विदेशी निवेशकों का भारत की ओर आकर्षण बढ़ा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती से भी विदेश निवेश बढ़ा है।

क्या है एफपीआई ?

आपको बता दे कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) सिर्फ और सिर्फ निवेश के इरादे से किया जाता है। इसमें निवेशक अपना पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए अलग-अलग प्रोडक्ट्स में निवेश करते है। इनका उद्देश्य कंपनी के प्रबंधन में शामिल होना नहीं होता। जबकि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति किसी दूसरे देश की किसी कंपनी के बिजनेस में निवेश करके उसमें अपनी हिस्सेदारी खरीदते हैं।

मोदी राज में अर्थव्यवस्था में तेजी के पीछे कुछ संकेत इस प्रकार है :

FDI के मोर्चे पर भारत ने चीन को पछाड़ा

भारत 20 साल में पहली बार एफडीआई हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया। वर्ष 2018 में वालमार्ट, Schneider Electric और यूनीलीवर जैसी कंपनियों से भारत में आए निवेश के चलते ये संभव हो सका। इस दौरान भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका।

बेहतर कारोबारी माहौल

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित बहुत सारे उपाय किए गए हैं।

चीन से ज्यादा रहेगी भारत की ग्रोथ रेट- आईएमएफ

देश की अर्थव्यवस्था 2019 में 7.5 प्रतिशत और 2020 में 7.7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अनुमान लगाते हुए कहा कि इन दो साल के दौरान चीन की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट एक प्रतिशत अंक ज्यादा रहेगी। 2019 और 2020 में चीन की ग्रोथ रेट 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। आईएमएफ ने जनवरी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली

भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी।

 


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