नवंबर महीने में अब तक हुआ 17,722 करोड़ रूपए का एफपीआई निवेश

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। नतीजतन, विदेशी निवेशकों का भारत के बाजार पर लगातार विश्वास बढ़ रहा है। और भारतीय बाजार में विदेशी निवेश का बढ़ता पैमाना विदेशी निवेशकों के मजबूत होते विश्वास को दर्शाता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने नवंबर महीने में भारतीय बाजारों में अबतक 17,722 करोड़ रुपये की पूंजी लगायी है। उत्साहजनक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेतकों को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने ये पूंजी डाली है । डिपोजिटरी के आंकड़े के अनुसार विदेशी निवेशकों ने एक नवंबर से 22 नवंबर के दौरान शेयरों में 17,547.55 करोड़ रुपये का निवेश किया जबकि 175.27 करोड़ रुपये का निवेश बांड में किया गया। इस प्रकार कुल 17,722.82 करोड़ रुपये के एफपीआई ने निवेश किये।

क्या है एफपीआई ?

आपको बता दे कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) सिर्फ और सिर्फ निवेश के इरादे से किया जाता है। इसमें निवेशक अपना पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए अलग-अलग प्रोडक्ट्स में निवेश करते है। इनका उद्देश्य कंपनी के प्रबंधन में शामिल होना नहीं होता।

इससे पहले, विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में 16,464.6 करोड़ रुपये जबकि 6,557.8 करोड़ रुपये सितंबर में घरेलू पूंजी बाजार (शेयर और बांड) में लगाये थे।

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार एफपीआई अभी भी बाजारों में अपना निवेश बढ़ाने को लेकर चिंतित हैं। सैमको सिक्युरिटीज के शोध प्रमुख उमेश मेहता ने कहा, ”उच्च मूल्यांकन और निफ्टी के रिकार्ड स्तर के आसपास होने के बीच भारत को लेकर एफपीआई अपेक्षाकृत सतर्क हैं। बड़े और छोटे / मझोले के बीच अंतर को देखते हुए सतर्कता बरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आने वाले महीनों में जीडीपी के कमजोर आंकड़े की आशंका को देखते हुए निवेशक थोडा झिझक रहे हैं।

हालाँकि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई बड़े सुधारों की प्रक्रिया शुरू की है। इससे भारत को लेकर दुनिया की सोच बदली है। और दुनिया भर की सभी प्रमुख कंपनियां आज भारत में निवेश करने के लिए भारत का रुख करना चाह रही है।

2019 में हुआ 82,575 करोड़ का रिकॉर्ड एफपीआई निवेश

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इस साल विदेशी फंडों ने भारत में बंपर निवेश किया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के लिए यह साल काफी अच्छा रहा है। इस साल देश में 82,575 करोड़ रुपए का एफपीआई निवेश हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत चीन के बाद विदेशी निवेशकों का पसंदीदा स्थान बना हुआ है। इससे साफ़ जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा जीता है। इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, मई 2014 में मोदी कार्यकाल शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने इस साल, 2019 में भारत में सबसे ज्यादा धन लगाया है। हांगकांग में विरोध प्रदर्शनों के चलते भी विदेशी निवेशकों का भारत की ओर आकर्षण बढ़ा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती से भी विदेश निवेश बढ़ा है।

मोदी राज में अर्थव्यवस्था में तेजी के पीछे कुछ संकेत इस प्रकार है :

FDI के मोर्चे पर भारत ने चीन को पछाड़ा

भारत 20 साल में पहली बार एफडीआई हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया। वर्ष 2018 में वालमार्ट, Schneider Electric और यूनीलीवर जैसी कंपनियों से भारत में आए निवेश के चलते ये संभव हो सका। इस दौरान भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका।

बेहतर कारोबारी माहौल

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित बहुत सारे उपाय किए गए हैं।

चीन से ज्यादा रहेगी भारत की ग्रोथ रेट- आईएमएफ

देश की अर्थव्यवस्था 2019 में 7.5 प्रतिशत और 2020 में 7.7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ेगी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने सोमवार को यह अनुमान लगाते हुए कहा कि इन दो साल के दौरान चीन की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट एक प्रतिशत अंक ज्यादा रहेगी। 2019 और 2020 में चीन की ग्रोथ रेट 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।आईएमएफ ने जनवरी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट में कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली

भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी।