भारतीय बाजारों में एफपीआई का बढ़ता भरोसा

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मोदी सरकार के दूरदर्शी नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था न केवल वापस पटरी पर आई है बल्कि लगातार परवान चढ़ती जा रही है। ये मौजूदा सरकार की नीतियों का ही असर है कि आज भारतीय बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। अब एफपीआई ने मार्च में पूंजी बाजार मे 38,211 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे पहले फरवरी में एफपीआई ने 11,182 करोड़ रुपये का निवेश किया था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने एक से 22 मार्च के दौरान शेयरों में शुद्ध रूप से 27,424.18 करोड़ रुपये का निवेश किया जबकि इसी दौरान उन्होंने ऋण या ब्रांड बाजार में 10,787.02 करोड़ रुपये का निवेश किया। नतीजतन उनका कुल निवेश 38,211.20 करोड़ रुपये का रहा| जो कई मायनो में बेहद अहम् है|

फरवरी माह में देश का निर्यात बढ़कर हुआ 2.44 फीसदी

अर्थव्यवस्था के मजबूती का अंदेशा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश का निर्यात फरवरी माह में 2.44 प्रतिशत बढ़कर 26.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी इन आंकड़ों के अनुसार, देश का वाणिज्यिक निर्यात फरवरी महीने में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 2.44 फीसदी बढ़कर 26.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान औषधि, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र के उत्पादों की निर्यात मांग भी बढ़ी है। इतना ही नहीं, इसके साथ ही फरवरी में आयात में 5.4 फीसदी की गिरावट भी रही और यह 36.26 अरब डॉलर पर आ गया। लिहाजा अगर इन आंकड़ो पर गौर किया जाये तो पता चलता है की इससे व्यापारिक घाटे में काफी हद तक कमी आई है|

RBI

2.06 अरब डॉलर बढ़कर 400.24 हुआ अरब डॉलरविदेशी मुद्रा भंडार

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फरवरी के समाप्ति सप्ताह में 2.063 अरब डॉलर बढ़कर 400.24 अरब डॉलर हो गया।है। इससे पिछले सप्ताह देश का मुद्राभंडार 1.497 अरब डॉलर बढ़कर 398.178 अरब डॉलर हो गया था।जहाँ एक तरफ रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये गए आंकड़े के मुताबिक समीक्षाधीन सप्ताह में आरक्षित स्वर्ण भंडार 76.49 करोड़ डॉलर बढ़कर 22.686 अरब डॉलर हो गया है। वहीँ दुसरे तरफ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ विशेष निकासी अधिकार 62 लाख डॉलर बढ़कर 1.470 अरब डॉलर हो गया। केन्द्रीय बैंक ने इस सन्दर्भ में कहा कि आईएमएफ में देश का मुद्राभंडार भी 1.12 करोड़ डॉलर बढ़कर 2.654 अरब डॉलर हो गया। इन आंकड़ो से जुडी ख़ास बात यह है कि विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जो यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में 311 अरब डॉलर के करीब था।

2018 में जुटें रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये

जहाँ एक तरफ साल 2018 में सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों में अपनी हिस्सेदारी की बिक्री करके रिकॉर्ड 77,417 करोड़ रुपये जुटाये हैं। वही दुसरे तरफ साल 2018 में हुए बड़े विनिवेश सौदों में ओएनजीसी द्वारा एचपीसीएल का अधिग्रहण, सीपीएसई ईटीएफ, भारत-22 ईटीएफ और कोल इंडिया की हिस्सेदारी बिक्री समेत छह आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) समेत कई अन्य शामिल हैं। विनिवेश में इस कदर तेजी एयर इंडिया के निजीकरण के साथ साल 2019 में भी जारी रहने की सम्भावना जताई जा रही है|

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मोदी सरकार ने सिर्फ साढ़े चार साल में जुटाई यूपीए से दोगुनी से ज्यादा राशि

मौजूदा सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान विनिवेश के जरिए रिकॉर्ड तोड़ राशि जुटाई है। ठीक इसी तरह विनिवेश के मामले में भी मोदी सरकार ने मनमोहन सरकार को पछाड़ दिया है। बेहदअल्प कार्यकाल में एनडीए सरकार ने 2,09,896.11 करोड़ रुपए जुटाए जो यूपीए-1 और यूपीए-2 की कुल राशि से करीब दोगुनी से भी ज्यादा राशी है। असल में इसमें सौ बात की एक बात यही है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के मजबूत आर्थिक नीतियों के कारन ही किसी सरकार ने पहली दफा विनिवेश के जरिये इतनी मोटी रकम इक्कठा की है|

बेहद सहज हुआ व्यापारिक माहौल

देश में कारोबारी माहौल को बेहतरी प्रदान करने के लिए मौजूदा सरकार ने सत्ता में आते ही इससे जुड़े अनेको कदम उठाएं| इसी सिलसिले में सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ जैसे नीति को बढ़ावा दिया ताकि देश में कारोबार को गति मिल सकें। मालूम हो कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों समेत लगभग 7,000 उपाय किए गए हैं, जिससे कारोबार को आसान बनाने के लिए हल निकाला जा सके। इसको लेकर सबसे खास बात यह है कि इस क्रम में केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को भी जीवित रूप प्रदान किया गया है|

सरकारी नीतियों में पारदर्शिता

मौजूदा सरकार के पारदर्शी नीतियों के वजह से ही परिवर्तन मुमकिन हो पाया है| सरकार ने हर सेक्टर में टेंडर के प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है| जिससे न तो भ्रष्टाचार हो और न ही कामो में कोई गुरेज रहे| यही वजह है की हमें आज अनेको परिवर्तन के उदहारण देखने को मिल रहे है|

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने बदली दी लोगो की धारणा

अमूमन टैक्स को लेकर लोगो के मन में धारणा विकसित रहती है की वो काफी पेचीदा होता है लेकिन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी)ने टैक्स को लेकर लोगो के धारणा को ही पलट कर रख दिया। जीएसटी ने वाकई में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ के अवधारणा को जीवित किया और दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच अपनी विश्वसनीयता को बरक़रार रखा| नतीजतन बीतते समय के साथ लोगो ने मोदी सरकार के ‘वन नेशन, वन टैक्स’ को खूब सराहा|