बजट के साथ हो सकती है चौथे आर्थिक पैकेज की घोषणा

कोरोना संक्रमण से बुरी तरह चोट खाई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार की ओर से अब तक तीन राहत पैकेज दिए जा चुके हैं। अब चौथे राहत पैकेज की भी तैयारी हो रही है। लेकिन अलग से इसका ऐलान नहीं होगा। सरकार  2021-22 के आम बजट में इकोनॉमी के लिए चौथे राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है। इसके संकेत खुद केंद्र सरकार दे रही है।

बड़े पैकेज का ऐलान हो सकता है

सरकारी सूत्रों के मुताबिक बजट में जिस पैकेज का ऐलान होगा, वह काफी बड़ा हो सकता है। शायद यह पहले पैकेज के 20 लाख करोड़ रुपये के बराबर हो सकता है। सरकार की ओर से चौथे राहत पैकेज का संकेत बजट पूर्व अलग-अलग उद्योगों के प्रतिनिधियों से वित्त मंत्री की मुलाकात में मिल रहे है। सरकार इसके लिए कच्चे माल का आयात सस्ता कर सकती है और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश का ऐलान कर सकती है , बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा करने का ऐलान कर सकती है। इसके अलावा उन सेक्टरों को विशेष राहत पैकेज मिल सकता है जिनको अभी तक कोई खास राहत पैकेज नहीं मिला है। इनमें ट्रैवल, टूर, हौस्पिटैलिटी, होटल और एविएशन सेक्टर शामिल हैं।

सर्विस सेक्टर के साथ मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर भी जोर

सरकार इस बजट में सर्विस सेक्टर के साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर पर पूरा जोर देगी। पीएलआई स्कीम के तहत कंपनियों को मैन्यूफैक्चरिंग के लिए प्रोत्साहित करने के लिए नई स्कीमों का ऐलान किया जा सकता है। इसके साथ ही सरकार का रोजगार बढ़ाने पर पूरा जोर होगा। हाल में श्रम मंत्रालय की ओर से दो रोजगार सर्वे कराने का फैसला किया है। इसके तहत घरेलू कामगारों की रोजगार की स्थिति का पता किया जाएगा। खबरों के मुताबिक सरकार बजट में रोजगार सृजन के लक्ष्य का ऐलान कर सकती है।

वैसे देश आर्थिक मोर्चे पर अच्छा कर सके इसके लिए लगातार सरकार कारोबार को बढ़ाने के लिये कवायद कर रही है। जिसका असर भी दिख रहा है। देश के हो या विदेश के आर्थिक जानकार ये मान रहे हैं कि सरकार की कोशिश का ही असर है कि आज भारत की अर्थव्यवस्था फिर से चल पड़ी है हां ये जरूर है कि अभी इस बाबत रफ्तार कुछ धीमी है लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले साल में इसकी स्पीड तेज हो जायेगी और सरकार इसी तरफ कदम भी बढ़ा रही है। जिसके चलते छौथे बड़े राहत पैकेज की घोषणा की तैयारी हो रही है लेकिन इस बार इसे बजट के साथ जारी किया जायेगा। अब देखना ये होगा कि सरकार की इस कवायद का क्या असर होता है।