अर्थव्यवस्था पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का बड़ा बयान- जीडीपी की सुस्त रफ्तार से चिंतित नहीं

Former President Pranab Mukherjee's big statement on the economy

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Former President Pranab Mukherjee) ने बुधवार को कहा कि आर्थिक मंदी (Economic Slowdown) को लेकर वो चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें हो रही हैं, जिनका जीडीपी पर असर दिख रहा है। यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रह चुके मुखर्जी ने ये भी कहा कि सरकारी बैंकों में पूंजी डालने की जरूरत है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

चिंता की बात नहीं

भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (ISI) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘देश में जीडीपी वृद्धि की धीमी दर को लेकर मैं चिंतित नहीं हूं। कुछ चीजें हो रही हैं जिनके अपने प्रभाव होंगे।’

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान देश की GDP बढ़त के अनुमान को 6.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। इसके पहले रिजर्व बैंक ने अक्टूबर महीने में नीतिगत समीक्षा में यह अनुमान जाहिर किया था कि वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी बढ़त 6.1 फीसदी हो सकती है, लेकिन अब रिजर्व बैंक ने कहा है कि जोखिम पर संतुलन बनने के बावजूद जीडीपी ग्रोथ अनुमान से कम रह सकती है।

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

नवंबर में हुआ 22,872 करोड़ का एफपीआई निवेश

FPI_Investment

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। नतीजतन, विदेशी निवेशकों का भारत के बाजार पर लगातार विश्वास बढ़ रहा है। और भारतीय बाजार में विदेशी निवेश का बढ़ता पैमाना विदेशी निवेशकों के मजबूत होते विश्वास को दर्शाता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने नवंबर महीने में भारतीय बाजारों में 22,872 करोड़ रुपये की पूंजी लगायी है। उत्साहजनक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेतकों को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने ये पूंजी डाली है । डिपोजिटरी के आंकड़े के अनुसार विदेशी निवेशकों ने एक नवंबर से 29 नवंबर के दौरान ऋणपत्रों से 2,358.2 करोड़ रुपये निकाले, जबकि इक्विटी में उन्होंने 25,230 करोड़ रुपये का निवेश किया। इस प्रकार कुल 22,871.8 करोड़ रुपये के एफपीआई ने निवेश किये।

विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है। मोदीराज में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तीन दिसंबर तक बढ़कर 451.7 अरब डॉलर के नए स्तर पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह बताया और उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से अब तक विदेशी मुद्रा भंडार में 38.8 अरब डॉलर की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। यह हाल के वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।

बता दे की विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

बेहतर कारोबारी माहौल

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित बहुत सारे उपाय किए गए हैं।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी

प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। यही वजह है कि जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।