विदेशियों को खूब भा रहा भारत में पैदा हुआ मोटा अनाज, निर्यात में हुआ भारी इजाफा 

मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती, मेरे देश की धरती… शायद ही बहुत कम लोग होंगे जिन्होने ये गाना नहीं सुना होगा लेकिन हकीकत ये है कि ये गाना के साथ साथ हकीकत भी है कि मेरे देश की धरती सोना उगलती है क्योंकि इसी के चलते कोरोना आपदा के बाद भी हमारी इकोनॉमी पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। देश में पैदा हुए मोटे अनाज के लगातार निर्यात के चलते आज देश की इकोनॉमी मजबूत हो रही है।

मोटे अनाज का रिकार्ड तोड़ हो रहा निर्यात

कोविड-19 महामारी के गंभीर संकट के दौरान अप्रैल-दिसंबर 2020 की अवधि में देश से अनाज का निर्यात इससे पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए 32,591 करोड़ रुपए के मुकाबले बढ़कर 49,832 करोड़ रुपए पहुंच गया. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अनाज निर्यात में रुपए की दृष्टि से 52.90 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर की दृष्टि से 45.81 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जो ये बताता है कि भारत आज कृषि के सेक्टर में कहां खड़ा है। वैसे अगर देखा जाये तो भारत से सबसे ज्यादा बासमती चावल का निर्यात हुआ है। आंकड़ो पर नजर डाले तो बासमती का  2,038 करोड़ रुपये (2.947 अरब डॉलर) का रहा जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान 1,926 करोड़ रुपये (2.936 अरब डॉलर) का रहा था। इतना ही नहीं इस बार भारत में पैदा हुए मक्का की मांग अमेरिका में सबसे ज्यादा है। तो आस्ट्रेलिया में सीधे बनारस से आम निर्यात किये जा रहे हैं। तो उज्बेकिस्तान में गेहूं,चावल और सोयाबीन की बहुत मांग है तो भूटान में भारत की हरी सब्जियों को खूब पंसद किया जा रहा है। जिससे किसान की आय बढ़ रही है।

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सरकार की नियत बदली तो किसान की जेब भरी

आज जो हालात बने हैं ऐसा नहीं कि इसके पीछे सारा काम मोदी सरकार ने किया है। इससे पहले की सरकारों के काम के चलते ही आज यहां तक का रास्ता जरूर बना है लेकिन हां ये जरूर कह सकते हैं कि पिछले 7 सालों में किसान की आय बढ़े इसके लिये जितनी तेजी से काम किया गया वो जरूर तारीफ के काबिल है। किसान को खेती की सही जानकारी देना, इसके लिये सरकार ने किसानों की खूब मदद की तो किसान को खेती में आने वाली दिक्कतो को कम करके सहूलियत ज्यादा दी गई जिससे पैदावार काफी बढ़ी जिसके चलते आज हम देश के सामान को बाहर भेज पा रहे हैं और खुद भी सस्ते दामो में देश में खरीद पा रहे हैं। इशके साथ साथ मोदी सरकार से पहले सबसे बड़ी समस्या थी किसान के माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पहंचाना, जिसे सरकार ने किसान उड़ान योजना किसान रेल के जरिये सरल बना दिया जिससे परिवहन खर्ज भी कम हुआ और माल की बर्बादी भी कम होने लगी। इसके साथ साथ कृषि बिल के जरिये किसान को अधिक शक्ति दी गई जिससे बिचौलियों का अंत हुआ और किसान की आय बढ़ने लगी।

वैसे भी सरकार का वादा है कि वो किसान की आये आजादी के 75 वें वर्षगाठ में दोगुनी करके दिखायेंगे और इस तरफ जिस तरह से कदम उठाये जा रहे हैं उससे तो यही लगता है कि मोदी जी के दूसरे वादों की तरह ये भी पूरा होकर रहेगा। बस कुछ मतलब परस्त लोग इसमे रोड़े ना अटकाये। इसके लिये हमे सावधान रहना होगा।

 

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