विदेशी मीडिया ने क्या कहा भारत के एंटी-सैटेलाइट मिसाइल के परीक्षण पर

जानकारों की मानें तो मिशन शक्ति भारत के लिए उतना ही सामरिक महत्व का है जितना की वर्ष 1998 मे किया गया परमाणु परीक्षण| बेहद सफल एंटी सैटेलाइट मिसाइल परीक्षण ने भारत को अमेरिका, रूस और चीन के न सिर्फ समकक्ष खड़ा कर दिया है, बल्कि पाकिस्तान जैसे प्रतिद्वंदी देश के मुकाबले काफ़ी आगे ला दिया है| भारत बुधवार को ए-सैट परीक्षण करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है| इस परीक्षण को मिशन शक्ति के तहत पूरा किया गया| इससे पहले केवल दुनिया के तीन ही देश ऐसे थे जो ए-सैट परीक्षण कर चुके हैं| ये देश अमेरिका, चीन और रूस है| भारत के इस परीक्षण से उसकी शक्ति अंतरिक्ष के मामले में काफ़ी बढ़ गयी है| यही वजह है की भारत की इस बड़ी उपलब्धि से चीन और पाकिस्तान नाखुश है|

A-SAT

ऐसे में दुनियाभर की मीडिया की नज़र भी भारत पर ही रही | भारत के अंतरिक्ष महाशक्ति बनने पर विदेशी मीडिया ने क्या कहा-

वॉशिंगटन पोस्ट, अमेरिका

अमेरिका के वाशिंगटन पोस्ट ने भारत के ए- सैट परीक्षण पर कहा है, स्पेस में नई एंट्री, “भारत अब दुनिया का सबसे अहम स्पेस क्लब का सदस्य बन गया है | इस स्पेस क्लब में पहले अमेरिका, रूस और चीन है| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के एंटी सैटेलाइट मिशन को शक्ति और शांति का प्रतीक बताया है|”

शिन्हुआ, चीन

चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ का कहना है कि, “भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर चौंका दिया है| उन्होंने दावा किया है की भारत ने अंतरिक्ष में सैटेलाइट मार गिराया है| अब भारत एलीट स्पेस रेस में शामिल हो गया है| मोदी ने इसे देश की सुरक्षा के लिए जरुरी बताया है|”

क्या कहना है पड़ोसी देश का-

चीन- भारत की इस उपलब्धि पर चीन ने भारत के उपग्रह रोधी मिसाइल परीक्षण पर बुधवार को सतर्कतापूर्वक प्रतिक्रिया जताते हुए उम्मीद जतायी कि, “हम ये उम्मीद करते हैं की दुनिया के सभी देश अंतरिक्ष में शांति बनाए रखेंगे| हम हमेशा से ये कोशिश करते रहे हैं कि अंतरिक्ष का इस्तेमाल केवल शांति के लिए हो|”

इस परीक्षण का भारत के कूटनीतिक सर्किल पर भी बड़ा असर पड़ने की बात कही जा रही है| खास तौर पर अंतरिक्ष को हथियारों की होड़ से बचाने के लिए भविष्य में जो अंतरराष्ट्रीय समझौता किया जाएगा, भारत उसका अब अहम हिस्सा होगा| वासानी कहते हैं कि “हमने समय पर परमाणु परीक्षण नही किया इसका नतीजा यह हुआ की हम एनपीटी में शामिल नही हो सके और अभी तक इसकी बंदिश महसूस करते हैं| लेकिन अभी बाहरी अंतरिक्ष को हथियारों की होड़ से बचाने के लिए एक समझौता(पारोस-प्रीवेंशन ऑफ़ एन आर्म रेस इन आउटर स्पेस) पर बात हो रही है|