मोदीराज में विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया रिकॉर्ड

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Foreign exchange reserves set a record in Modiraj

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है।

मोदीराज में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तीन दिसंबर तक बढ़कर 451.7 अरब डॉलर के नए स्तर पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को यह बताया और उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से अब तक विदेशी मुद्रा भंडार में 38.8 अरब डॉलर की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। यह हाल के वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।

रिजर्व बैंक द्वारा 22 नवंबर तक के जारी आंकड़ों के मुताबिक सप्ताह के दौरान देश का विदेशी मुद्रा भंडार 34.7 करोड़ डॉलर बढ़कर 448.60 अरब डॉलर पर पहुंच गया। देश का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले कुछ महीनों से लगातार नयी ऊंचाइयों को छू रहा है और यह पहली बार 450 अरब डॉलर के पार पहुंचा है।

वहीँ रिजर्व बैंक (RBI) ने ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया है। बाजार को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक लगातार छठवीं बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सभी 6 सदस्य ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में नहीं थे। हालांकि रिजर्व बैंक ने भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना जताई है।

बता दे की विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की इकोनॉमी दिन दूनी-रात चौगुनी तरक्की कर रही है। आज पूरी दुनिया में इंडियन इकोनॉमी का बोलबाला है। अर्थव्यवस्था के मामले में भारत आज विश्व की चोटी के देशों को चुनौती दे रहा है। आईएचएस मार्किट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इस साल ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 तक भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश हो जाएगा।

Forex_Money-dollar

क्या है विदेशी मुद्रा भंडार?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई विदेशी मुद्रा या अन्य परिसंपत्तियां हैं। जरूरत पड़ने पर इस भंडार से देनदारियों का भुगतान किया जाता है। विदेशी मुद्रा भंडार को फॉरेक्स रिजर्व भी कहा जाता है।

इकोनॉमी के लिए क्यों जरूरी है विदेशी मुद्रा भंडार?

देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम योगदान होता है। जैसे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जब सात महीनों के लिए देश के प्रधानमंत्री थे, तब देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी।

तब भारत की अर्थव्यवस्था भुगतान संकट में फंसी हुई थी। इसी समय रिजर्व बैंक ने 47 टन सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने का फैसला किया था। उस समय के गंभीर हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था।

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया।

मोदी राज में अर्थव्यवस्था में तेजी के पीछे कुछ संकेत इस प्रकार है :

2019 में हुआ 82,575 करोड़ का रिकॉर्ड एफपीआई निवेश

FPI Investment

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की वजह से देश में कारोबारी माहौल अच्छा हुआ है और पूंजी बाजार में देश के ही नहीं, विदेश के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। इस साल विदेशी फंडों ने भारत में बंपर निवेश किया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के लिए यह साल काफी अच्छा रहा है। इस साल देश में 82,575 करोड़ रुपए का एफपीआई निवेश हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत चीन के बाद विदेशी निवेशकों का पसंदीदा स्थान बना हुआ है। इससे साफ़ जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा जीता है। इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, मई 2014 में मोदी कार्यकाल शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने इस साल, 2019 में भारत में सबसे ज्यादा धन लगाया है। हांगकांग में विरोध प्रदर्शनों के चलते भी विदेशी निवेशकों का भारत की ओर आकर्षण बढ़ा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती से भी विदेश निवेश बढ़ा है।

आपको बता दे कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) सिर्फ और सिर्फ निवेश के इरादे से किया जाता है। इसमें निवेशक अपना पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए अलग-अलग प्रोडक्ट्स में निवेश करते है। इनका उद्देश्य कंपनी के प्रबंधन में शामिल होना नहीं होता। जबकि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति किसी दूसरे देश की किसी कंपनी के बिजनेस में निवेश करके उसमें अपनी हिस्सेदारी खरीदते हैं।

बेहतर कारोबारी माहौल

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित बहुत सारे उपाय किए गए हैं।

ब्रिटेन को पछाड़ कर भारत इसी वर्ष बन जाएगा विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था

वैश्विक सलाहकार कंपनी पीडब्ल्यूसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी विकास दर को लेकर बेहद उत्साहजनक अनुमान लगाया है। अपनी रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि भारत इसी वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में ब्रिटेन को पीछे छोड़ पांचवें स्थान पर आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक लगभग समान विकास दर और आबादी के कारण ब्रिटेन और फ्रांस दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में आगे-पीछे होते रहते हैं। लेकिन यदि भारत इस सूची में आगे निकलता है तो उसका स्थान स्थायी रहेगा। पीडब्ल्यूसी की वैश्विक अर्थव्यवस्था निगरानी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस वर्ष ब्रिटेन की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 1.6 फीसदी, फ्रांस की 1.7 फीसदी तथा भारत की 7.6 फीसदी रहेगी। 2017 में भारत 2,590 अरब डॉलर के बराबर जीडीपी के साथ फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था।

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली

भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी।

 


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