मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का असर, विदेशी मुद्रा भंडार 448.2 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर

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foreign exchange reserves at record level of $ 448.2 billionप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 448.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 15 नवंबर को समाप्त सप्ताह में 44.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 448.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले कई सप्ताह से लगातार वृद्धि कायम है। पिछले सप्ताह विदेशी मुद्रा भंडार 447.808 अरब डॉलर था। बता दे कि विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की इकोनॉमी दिन दूनी- रात चौगुनी तरक्की कर रही है। आज पूरी दुनिया में इंडियन इकोनॉमी का बोलबाला है। अर्थव्यवस्था के मामले में भारत आज विश्व की चोटी के देशों को चुनौती दे रहा है। आईएचएस मार्किट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इस साल ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 तक भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश हो जाएगा।

मोदी सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिये कई कदम उठाए हैं, इसमें मंजूरी के लिए नियत समयसीमा और कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिये प्रक्रियाओं को दुरूस्त करना शामिल हैं। पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया।

मोदी राज में अर्थव्यवस्था में तेजी के पीछे कुछ संकेत इस प्रकार है :

2019 में हुआ 82,575 करोड़ का रिकॉर्ड एफपीआई निवेश

FPI_Investment_in_2019

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों की वजह से देश में कारोबारी माहौल अच्छा हुआ है और पूंजी बाजार में देश के ही नहीं, विदेश के निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। इस साल विदेशी फंडों ने भारत में बंपर निवेश किया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के लिए यह साल काफी अच्छा रहा है। इस साल देश में 82,575 करोड़ रुपए का एफपीआई निवेश हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत चीन के बाद विदेशी निवेशकों का पसंदीदा स्थान बना हुआ है। इससे साफ़ जाहिर होता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा जीता है। इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, मई 2014 में मोदी कार्यकाल शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने इस साल, 2019 में भारत में सबसे ज्यादा धन लगाया है। हांगकांग में विरोध प्रदर्शनों के चलते भी विदेशी निवेशकों का भारत की ओर आकर्षण बढ़ा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती से भी विदेश निवेश बढ़ा है।

आपको बता दे कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) सिर्फ और सिर्फ निवेश के इरादे से किया जाता है। इसमें निवेशक अपना पोर्टफोलियो तैयार करने के लिए अलग-अलग प्रोडक्ट्स में निवेश करते है। इनका उद्देश्य कंपनी के प्रबंधन में शामिल होना नहीं होता। जबकि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति किसी दूसरे देश की किसी कंपनी के बिजनेस में निवेश करके उसमें अपनी हिस्सेदारी खरीदते हैं।

बेहतर कारोबारी माहौल

पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित बहुत सारे उपाय किए गए हैं।

ब्रिटेन को पछाड़ कर भारत इसी वर्ष बन जाएगा विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था

वैश्विक सलाहकार कंपनी पीडब्ल्यूसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था और इसकी विकास दर को लेकर बेहद उत्साहजनक अनुमान लगाया है। अपनी रिपोर्ट में एजेंसी ने कहा कि भारत इसी वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में ब्रिटेन को पीछे छोड़ पांचवें स्थान पर आ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक लगभग समान विकास दर और आबादी के कारण ब्रिटेन और फ्रांस दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में आगे-पीछे होते रहते हैं। लेकिन यदि भारत इस सूची में आगे निकलता है तो उसका स्थान स्थायी रहेगा। पीडब्ल्यूसी की वैश्विक अर्थव्यवस्था निगरानी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि इस वर्ष ब्रिटेन की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 1.6 फीसदी, फ्रांस की 1.7 फीसदी तथा भारत की 7.6 फीसदी रहेगी। 2017 में भारत 2,590 अरब डॉलर के बराबर जीडीपी के साथ फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया था।

सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली

भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी।

 


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