पहला आंदोलन जिसके विरोध में देश की जनता ने खोला मोर्चा

कहते है न बुरे काम का बुरा नतीजा, आज किसान आंदोलन का भी वही हाल हो रहा। जिस तरह से गणतंत्र दिवस के दिन लालाकिले पर देश के झंडे का अपमान किया गया या फिर देश के जवानों पर हमला  किया गया उससे लगता यही है  कि इनका बकसद सिर्फ हंगामा खड़ा करना था जो उन लोगों ने कर के दिखा दिया। हालांकि अब जनता ही खुद इन उपद्रवियों के खिलाफ सड़क पर उतर आई है जिसका एक नजरा सिंधु बार्डर पर देखने को मिला जब आसपास के लोगों ने आंदोलन पर बैठे लोगों को सड़क खाली करने के लिए प्रदर्शन किया।

सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन के खिलाफ आंदोलन

जिस तरह से गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली की सड़को में नंग नाच किसान के नाम पर कुछ उपद्रवियों ने किया वो आप सब ने देखा होगा। इतना ही नही कैसे लालकिले के प्रचीर पर एक धर्म विशेष का झंडा लगाकर देश की आत्मा संविधान को तार तार किया गया इससे भी सभी रूबरू हुए है लेकिन बस अब ये सब बर्दाश्त के बाहर है, तभी जनता इन बने हुए किसानो को जवाब देने के लिये सड़क पर उतर आई है जिसका नजारा सिंधु बॉर्डर में दिखा जिसमें लोगों ने खुद सड़क पर बैठे किसानो को हटाने की पहल की है। वैसे भी गणतंत्र दिवस में उपद्रवियों के कारनामो के बाद बहुत से लोग खुद इस प्रदर्शन को बीच में छोड़कर वापस अपने गांव की तरफ चल दिये है जो ये बता रहा है कि अब बस ये आंदोलन अपने अंत की तरफ चल दिया है।

नोएडा, गाजियाबाद बॉर्डर पर खत्‍म हुआ धरना

वही दूसरी तरफ खुद कुछ किसान यूनियन लालकिले में हुए हंगामे के बाद इस प्रदर्शन से पीछे हटने लगे है जिसके चलते नोएडा, गाजियाबाद बॉर्डर में कई जगह से धरना खत्म हो गया है। गाजीपुर बॉर्डर पर जहां पहले सैंकड़ों किसान मौजूद थे, वहीं गुरुवार सुबह यहां न के बराबर किसान दिखाई दिए। किसानों के लगाए गए टेंट उखड़ने लगे हैं। आंदोलनकारी किसान भी ट्रैक्टर लेकर वापस लौट रहे है। ऐसी ही और जगहों से भी खबर आ रही है। यानी की धीरे धीरे आंदोलन अब दम तोड़ रहा है जो ये बताता है कि इन लोगों की मांग कितनी गैरमतलब की थी। दूसरी तरफ पुलिस भी उपद्रवी लोगो के खिलाफ शिकंजा कसने लगी है जिसके चलते कई लोगो को नोटिस थमा दी गई है तो किसान नेताओ के पासपोर्ट जब्त कर लिये गये है। मतलब साफ है कि जिन लोगो ने दिल्ली की सड़को में नंग नाच किया है उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही शुरू हो गई है।

शायद किसान आंदोलन ऐसा आंदोलन होगा जिसके खिलाफ जनता सड़कों पर आंदोलन कर रही है। लेकिन अफसोस इस बात का हो रहा है कि जो बात जनता समझ गई कि ये लोग किसान के नाम पर सिर्फ सियासत कर रहे है वो बात देश के नेता नही समझ रहे है और अभी भी इन तथाकथित किसानों को सही बताने में लगे है। चलो उन्होने तो कसम खा ली है कि वो बिना बात के भी सरकार के खिलाफ हंगामा करने वालो का साथ देते रहेंगे तो देश की जनता ने भी मन बना लिया है कि वो इनको मंसूबों को पूरा नहीं होने देंगे।