किसानों को होना पड़ेगा दाल भात में मूसलचंद वाले लोगों से सावधान

देश में आजकल एक माहौल चल रहा है और वो है किसान के हमदर्द बनने का.. अगर इसकी तस्वीर देखना है तो आप दिल्ली से सटे बार्डर पर जाकर देख सकते है। जहां किसानों के हितैषी बनने का ऐसा ऐसा ड्रामा दिख रहा है कि बताना भी मुश्किल है। किसान के आंदोलन से वोट की फसल कांटने के चक्कर में वो लोग भी किसानों के साथ दिख रहे है जो कभी इसी बिल को लाने के लिए बेकरार दिखाई देते थे। ऐसे में किसान आंदोलन में रंग तो कई दिख रहे है लेकिन किसान की फ्रिक करने की जगह अपनी सियासत चमकाने का चिंता इन लोगो को ज्यादा है।

पूछता है भारत

जो लोग आज किसान के बड़े हितैशी बन रहे है और उनके आंदोलन को सही बता रहे है या फिर धरना स्थल पहुंचकर ये जता रहे है कि किसान के लिये वो हर पल खड़े है वो आजादी के बाद से अबतक कहां छुपे हुए थे। जब अन्नदाता अपनी फसल को लेकर मंडी जाता था और उसकी फसल बारिश से भीग जाती थी और उसका नुकसान हो जाता था तो ये लोग उसके घर क्यो नही खाना या उसकी सहायता करने जाते थे। क्यो जब कर्ज से किसान आत्महत्या करने पर मजबूर होता था तो ये लोग उसका कर्ज भरने के लिए आगे आते थे। सबका जवाब सिर्फ एक है कि वहां मीडिया नही होती थी और न ही उनकी लोकप्रियता बढती। बस इसीलिये तो वहां से ये टीवी में चमकने वाले लोग गायब रहते है लेकिन जैसे ही किसी भ्रम के कारण सरकार के खिलाफ कोई आंदोलन खड़ा होता है ये अपने नये नये तरीको से उस आंदोलन को हाइजेक करने पहुंच जाते है। मजे की बात ये है कि कुछ लोग तो ऐसे होते है जिन्हे आंदोलन का ‘आ’ भी नही पता होता, लेकिन फोटो खिचाने के लिये नये नये ड्रामा करते देखे जाते है। जनाब ऐसे लोगों से किसान से कोई प्यार नही है ये तो अपनी भाग्य को संवारने के लिये जाते है।

सरकार लगातार सुन रही किसानों की बात

दूसरी तरह कृषि कानून को लेकर मोदी सरकार लगातार किसानों से बात कर रही है। खुद पीएम मोदी ने किसानों को समझाने के लिये कई बार कई मंच से बयान दे चुके है। लेकिन इसके बावजूद भी किसानों के भ्रम को दूर करने के लिये लगातार सरकार किसानों से बात कर रही है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जो किसानों में अफवाह फैलाकर बैठको में रोड़ा अटकाना चाहते है जिससे वो सियासी रोटी सेक सके। ऐसे लोगो को ये लगता है कि जिस तरह अन्ना आंदोलन के बाद सरकार से जनता नाराज हो गई थी ठीक वैसे ही वो आज के हालात में कर सकते है लेकिन ये नही जानते कि मोदी सरकार ने जनता के लिए जितना काम किया है। पहले की सरकारो ने कुछ नही किया था तभी आंदोलन कितने भी क्यो न अफवाह फैलाकर किया जाये लेकिन देशवासियों के दिल से मोदी जी के प्रति प्यार कम नही कर पाते है और हर चुनाव में मोदी जी से मुंह की खाते है।

ऐसे में किसानों को अब ये सोचना चाहिये कि उनके आंदोलन में जो दाल भात में मूसलचंद बन रहे है वो दूर रहे क्योकि तभी कृषि बिल को लेकर सरकार और किसानों के बीच की दूरी दूर हो पायेगी और मसले का हल निकल पायेगा।