किसान आंदोलकारियों सुप्रीम कोर्ट की बात तो मानो

कृषि कानूनों  के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों को सड़कों से हटाने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई हुई। किसानों के आंदोलन  पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसानों को आंदोलन का हक है, लेकिन आप किसी शहर को बंद नहीं कर सकते हैं।

किसानों को बातचीत के लिए आगे आना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट  के मुख्य न्यायाधीश  ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम आपको  प्रदर्शन से नहीं रोक रहे हैं, प्रदर्शन करिए, लेकिन प्रदर्शन का एक मकसद होता है। आप सिर्फ धरना पर नहीं बैठक सकते है। बातचीत भी करनी चाहिए और बातचीत के लिए आगे आना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमें भी किसानों से हमदर्दी है। हम केवल यह चाहते हैं कि कोई सर्वमान्य समाधान निकल।सुनवाई के दौरान कोर्ट में किसी किसान संगठन के ना होने के कारण कमेटी पर फैसला नहीं हो पाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो किसानों से बात करके ही अपना फैसला सुनाएंगे। सुप्रीम कोर्ट में सर्दियों की छुट्टी हो रही है, ऐसे में अब मामले की सुनवाई वैकेशन बेंच करेगी।

वही ही हरीश साल्वे ने कहा, ‘प्रदर्शन के कारण ट्रांसपोर्ट पर असर पड़ा है और इस कारण सामान के दाम बढ़ रहे हैं। अगर सड़कें बंद रहीं तो दिल्ली वालों को काफी दिक्कत होगी’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के अधिकार का मतलब ये नहीं कि किसी शहर को बंद कर दिया जाए सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, ‘प्रदर्शन में मौजूद किसानों में से कोई भी फेस मास्क नहीं पहनता है, वे बड़ी संख्या में एक साथ बैठते हैं। कोविड-19  एक चिंता का विषय है किसान यहां से गांव जाएंगे और वहां कोरोना फैलाएंगे। किसान दूसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकते।

हर रोज हो रहा करोड़ो का नुकसान

किसान आंदोलन के कारण देश को हर लोग करोड़ों की चपत लग रही है। आर्थिक जगत पर नजर रखने वाले एसोचैम की माने तो करीब इस आंदोलन से हर रोज 3500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इतना ही नही सीआईआई  माने तो 50 फीसदी माल ढुलाई के दाम बढ़ गये है। रेलवे को भी इस आंदोलन से कम नुकसान नही हुआ है। मोटे ऑकड़ो पर नजर डाले तो रेले को अभी तक करीब 892 करोड़ रूपये का घाटा हो चुका है। इसी तरह दिल्ली के कारखानो में करोड़ो का माल बना हुए पड़ा है ठीक वक्त पर वो नही पहुंच पा रहा है। जिससे कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है। ऐसे में किसान आंदोलनकारियों को ये सोचना चाहिये कि वो इस आंदोलन से खुद की जड़ ही काट रहे है। जबकि दूसरी तरफ सरकार ने बिल को लेकर संसोदन करने की बात करके किसानों के सामने बड़ा दिल दिखाया है जबकि सियासत के चलते कुछ लोग बिल वापस लेने के लिये किसानों को भड़काने में लगे हुए है। जो ठीक नही है। इस ओर किसान को बी सोचना चाहिये।

मतलब साफ है कि किसान को अब आपने आंदोलन के बारे में सोचना चाहिये और इस बात पर भी विचार करना चाहिये कि हर बात पर हठधर्मिता ठीक नही है। तो सरकार को बड़ा दिल दिखाते हुए किसानों की मांगो को हाथो हाथ लेना चाहिये जिससे मसले का हल निकल सके और देश एक बार फिर से तेजी से विकास की तरफ रफ्तार भर सके।