किसान भाइयों, अब तो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष भी किसान कानून के साथ

कृषि कानून को लेकर कुछ तथाकथित किसान संगठनो को छोड़ दे तो ज्यादातर किसान इस नये बिल को ठीक ही बता रहे है। इसी क्रम में अब अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने कृषि कानूनों की तारीफ की है और कहा है कि यह कृषि सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कृषि बिल को बताया किसान हितैशी

मोदी सरकार द्वारा किसान की आय को बढ़ाने के लिये लाये गये नये कृषि कानून के साथ देश के ही नही विदेश के भी संगठन खड़े दिख रहे है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की माने तो भारत सरकार द्वारा पारित कृषि कानून में कृषि सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करने की क्षमता है। हालांकि, उन लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता है, जो नई प्रणाली से प्रभावित हो सकते हैं। इस कानून से किसानों को विक्रेताओं के साथ सीधे अनुबंध करने में और किसानों को बिचौलियों की भूमिका को कम करके ज्यादा लाभ कमाने और मदद मिलेगी। इसके अलावा नए कानूनों से कार्यक्षमता और ग्रामीण विकास में भी फायदा होगा। इससे ये पता चलता है कि मोदी सरकार ने जो कानून बनाया है वो कही न कही विश्व को भी भा रहा है और वो ये मान रही है कि देश के किसानों की आय जरूर इस कानून के लागू होने से बदलेगी।

देश के कृषि जानकार कर चुके है समर्थन

देश के कई बड़े कृषि जगत के जानकार नये किसान कानून को किसानो के लिये फायदे का सैदा बता चुके है। इन लोगो का साफ कहना है कि इस बिल से न तो मंडी खत्म हो रही है और न ही एमएसपी बल्कि किसान को बिल और ज्यादा ताकतवर बनाता है खासकर अगर आप अनुबंधित खेती करने की सोच रहे है क्योकि इसमे कई ऐसे नियम बनाये गये है जिसके तहत किसान को कंपनी से ज्यादा फायादा देने की बात कही गई है खासकर तब जब किसी प्रकृतिक आपदा के वक्त फसल खराब हो जाये तो भी कंपनी को किसान को पैसा देना होगा। वही किसान अपनी फसल को कही पर भी बेच सकता है। कितना ही नही देश के कई किसान संगठन भी किसान बिल पर सरकार के साथ खड़े दिख रहे है। खासकर बिहार हो या फिर दक्षिण भारत के किसान इस बिल को बेहतर मान रहे है। ऐसे में कुथ मोदी विरोधी तथाकथित किसान बनकर सिर्फ किसान विरोध के नाम पर देश में माहौल खराब करने में लगे है। जिनका मकसद न किसान है और न किसान का विकास वो तो बस किसान के सहारे सियासत जमकाने में लगे है।

वैसे किसान बिल पर कोर्ट ने कुछ वक्त के लिए रोक लगाकर और कमेठी बनाकर इस बिल के भ्रम को दूर करने की शुरूआत कर दी है। लेकिन किसान की हठधर्मिता के चलते अभी भी आंदोलन चल रहा हैजो ये बताता है कि किसान के सहारे कैसे कुछ मौकापरस्त लोग इस ताक में है कि बस सरकार को बदनाम किया जाये वरना वो किसान भाइयो को IMF की रिपोर्ट को नही बताते ।