आस्था को कभी भी आतंक से कुचला नहीं जा सकता- पीएम मोदी

सोमनाथ मंदिर में परियोजनाओं की शुरूआत करते हुए पीएम मोदी ने इशारे इशारे में तालिबान और उनके समर्थकों को संदेश भी दिया पीएम मोदी ने साफ बोला आस्था को कभी भी आतंक से कुचला नहीं जा सकता है। सोमनाथ मंदिर का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए पीएम ने कहा कि सैकड़ों सालों के इतिहास में हर बार इस मंदिर का अस्तित्व मिटाने का प्रयास किया गया लेकिन हर बार यह उठ खड़ा हुआ।

दुनिया आज भी आतंक की उसी विचारधारा से पीड़ित

PM मोदी ने कहा, ‘इस मंदिर को सैकड़ों सालों के इतिहास में कितनी ही बार तोड़ा गया। यहां की मूर्तियों को खंडित किया गया। इसका अस्तित्व मिटाने की हर कोशिश की गई। लेकिन इसे जितनी भी बार गिराया गया, ये उतनी ही बार उठ खड़ा हुआ। सरदार पटेल साहब, सोमनाथ मंदिर को स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र भावना से जुड़ा हुआ मानते थे।’ सोमनाथ मंदिर ऐसा स्थल है, जिसे हजारों साल पहले हमारे ऋषियों ने ज्ञान का क्षेत्र बताया था। जो आज भी पूरे विश्व के सामने आह्वान कर रहा है कि सत्य को असत्य से हराया नहीं जा सकता, आस्था को आतंक से कुचला नहीं जा सकता। दुनिया आज भी आतंक की उसी विचारधारा से पीड़ित है। आतंक का अस्तित्व स्थायी नहीं हो सकता है।’

सोमनाथ मंदिर से जुड़ी कुछ परियोजनाओं की सौगात’

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात की जनता को सोमनाथ मंदिर से जुड़ी कुछ परियोजनाओं की सौगात दी। उन्‍होंने वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के जरिए कुछ योजनाओं का उद्घाटन किया और कुछ की आधारशिला रखी। इनमें मंदिर से लगा समुद्र किनारे का वॉक वे, सोमनाथ प्रदर्शनी सेंटर और प्राचीन सोमनाथ मंदिर परिसर का पुननिर्माण प्रमुख हैं। इसके अलावा पीएम मोदी ने श्री पार्वती मंदिर की भी नींव रखी।

समुद्र किनारे टहलने के लिए समुद्र दर्शन पथ

पीएम मोदी ने जिन प्रॉजेक्‍ट का उद्घाटन किया है उनमें समुद्र किनारे बना वॉक वे अहम है। इसकी नींव दिसंबर में गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। मोदी ने शुक्रवार को 1.48 किलोमीटर लंबे इस वॉक वे का उद्घाटन किया। इसे समुद्र दर्शन पथ नाम दिया गया है। इसे मुंबई के मरीन ड्राइव की तर्ज पर बनाया गया है। इस पर करीब 45 करोड़ का खर्च आया है। इसके जरिए अरब सागर के किनारे पर्यटकों को रोमांचक सैर करने का अवसर मिलेगा। इतना ही नहीं समुद्र से होने वाला तट का कटाव भी रुकेगा।

पिछले 7 साल से केवल मंदिर को नया कलेवर नहीं दिया जा रहा है बल्कि इसके द्वारा जो भारतीय संस्कृति इतिहास के पन्नों में दब गई थी उसे फिर से प्रस्तुत किया जा रहा है। यानी भारत के भव्य इतिहास का फिर से जीणोद्धार हो रहा है।