अमित शाह ने विरोधियों को दी मात, महाराष्ट्र में फड़णवीस ने दोबारा ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

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देवेंद्र फडणवीस ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, अजित पवार बने उप मुख्यमंत्री

महाराष्ट्र में एक महीने से चला आ रहा राजनीतिक उठापटक आज सुबह उस समय समाप्त हो गया, जब बड़े नाटकीय तरीके से भारतीय जनता पार्टी के देवेन्द्र् फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का समर्थन मिल जाने के बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार को उपमुख्य मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। राज्यपाल भगत‍ सिंह कोश्या्री ने दोनों नेताओं को मुम्बई स्थित राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

आपको बता दें कि आज सुबह तक महाराष्ट्र में कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने की बात कही जा रही थी। तीनों दल उद्धव ठाकरे को सीएम बनाने पर सहमत भी हो गए थे और चर्चा थी कि आज औपचारिक तौर पर वे राज्यपाल से मिलकर दावा पेश करते, लेकिन इसी बीच बड़ा उलटफेर हो गया।

शपथग्रहण के बाद श्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों ने स्‍पष्ट जनादेश दिया था मगर चुनावी नतीजे आने के बाद से ही शिवसेना ने अन्य राजनीतिक दलों के साथ गठजोड़ की कोशिशें शुरू कर दी थीं। और इसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा था। उन्हों ने कहा कि महाराष्ट्र को स्थिर सरकार की जरूरत है, किसी खिचड़ी सरकार की नहीं इसीलिये बीजेपी और एनसीपी साथ आए हैं।

उप-मुख्यमंत्री, अजित पवार ने कहा कि विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से आज तक कोई भी अन्य पार्टी महाराष्ट्र में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं थी। किसानों समेत राज्य के लोगों को इससे समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इसीलिए उन्होंने राज्य में स्थिर सरकार देने के लिए यह कदम उठाया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देवेन्द्र फडणवीस को महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी है। उन्होंने उप-मुख्य्मंत्री अजित पवार को भी शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने ट्वीट करके भरोसा जताया कि ये दोनों नेता महाराष्ट्र के विकास के लिए काम करेंगे।

अमित शाह भाजपा अध्यक्ष हमेशा अपने चालों से विरोधियों को चौका देते है, इस बार भी महाराष्ट्र में कल रात तक इस बात की किसी को जरा भी भनक नहीं थी।  विरोधियों को मात देने में अमित शाह ने महारत हासिल की हुई है, आज के इस निर्णय से तो ऐसा ही साबित होता है। अमित शाह ने भी ट्वीट करके नए मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री को बधाई दी है। और कहा है कि मुझे विश्वास है कि यह सरकार महाराष्ट्र के विकास और कल्याण के प्रति निरंतर कटिबद्ध रहेगी और प्रदेश में प्रगति के नये मापदंड स्थापित करेगी।

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और जहाज़रानी मंत्री नितिन गडकरी ने देवेंद्र फड़णवीस को महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने पर बधाई दी है। उन्हों ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार को भी महाराष्ट्र के उप-मुख्य मंत्री के रूप में शपथ लेने पर बधाई दी है। एक ट्वीट में श्री गडकरी ने कहा कि देवेंद्र फड़णवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र में विकास की गाड़ी और तेज गति से चलेगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को देवेन्द्र फड़णवीस और अजित पवार को महाराष्ट्र के क्रमशः मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। योगी ने ट्वीट कर दोनों को बधाई दी और विश्वास जताया कि फड़णवीस और पवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र विकास के रास्ते पर चलेगा।

महाराष्ट्र में अचानक बड़ा उलटफेर होने के बाद जहां सियासी गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

इस बीच, राष्ट्र्वादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि महाराष्ट्र में सरकार के गठन के लिए भाजपा को समर्थन देने का अजित पवार का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से इसका कोई सम्बंध नहीं है। एक ट्वीट में उन्हों ने कहा है कि हम उनके फैसले का समर्थन नहीं करते।

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता अजित पवार ने सत्ता के लिए धोखाधड़ी का सहारा लिया है। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार का इस घटनाक्रम से कोई सम्बंध नहीं है और वे शिवसेना के साथ हैं।

क्या है दलगत स्थिति?

आपको बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों के लिए 21 अक्टूबर को चुनाव हुए थे और 24 अक्टूबर को परिणाम आए थे। चुनाव में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन आराम से सरकार बना सकता था मगर दोनों पार्टियों के बीच मुख्यमंत्री पद और ‘सत्ता में साझेदारी’ को लेकर मतभेद पैदा हो गए थे। किसी भी पार्टी या गठबंधन के सरकार बनाने का दावा पेश नहीं करने के बाद 12 नवंबर को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। शिवसेना के मुख्यमंत्री पद की मांग को लेकर बीजेपी से 30 साल पुराना गठबंधन तोड़ने के बाद से राज्य में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था।

 


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