विदेशी सैटेलाइट लॉँच और मिसाइलों का निर्यात – देश में विकास और विज्ञान की बदलती तस्वीर

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Changing Pictures of Development and Science in the Country

अंतरिक्ष विज्ञान और मिसाइल तकनीक में भारत की प्रगति पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर रही है| फरवरी २०१७ में इसरो ने एक साथ १०४ सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजकर इतिहास रचा था| इस से पहले एक अभियान के अंतर्गत सबसे ज्यादा सैटेलाइट्स भेजने का रिकॉर्ड रूस के नाम था जिसने २०१४ में एक अभियान में ३७ उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे थे| इसरो का ही अपना रिकॉर्ड एक साथ 20 सैटेलाइट्स को प्रक्षेपित करने का था| इस अभियान में अमेरिका और इजराइल जैसे विकसित देशों के उपग्रह शामिल थे, और दुनिया की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार गूगल और एयरबस जैसी कंपनी के सैटेलाइट्स इस अभियान के अंतर्गत अंतरिक्ष में भेजे गए थे|

अंतरिक्ष और मिसाइल तकनीक में भारत का कल

वैसे तो ये देश के लिए एक ऐतिहासिक पल था, जिस पर संपूर्ण भारत को गर्व है| लेकिन बीते दसक तक विदेशी तकनीक और सहायता पर निर्भर इसरो के लिए अपने आप को इस मुक़ाम तक पहुँचने की कहानी किसी साइंस फिक्शन से कम नहीं| विश्व की सबसे चर्चित पत्रिकाओं में से एक फोर्ब्स में साल २०१० में छपी ये “Cryogenic Technology: The India Story” रिपोर्ट भारत के क्रायोजेनिक इंजन प्रोग्राम की तत्कालीन वस्तुस्थिति का एक नमूना है|

ये सच है कि, क्रायोजेनिक इंजन प्रोग्राम तकनीकी रूप से एक बेहद ही पेचीदा प्रोग्राम है और इसमें महारत हासिल करने में रूस को भी करीब तीन दसक का इन्तजार करना पड़ा था| लेकिन आज भारत में भारतीय तकनीक से बना CE-20, दुनिया के सबसे पावरफुल हाई थ्रस्ट क्रायोजेनिक इंजन में से एक है|

जिस तरह से विकसित देशों की मनमानी और उनके अमेरिका के नेत्रित्व में लगाये गए प्रतिबंधों के वावजूद हमारे देश के अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम दुनिया के सबसे विकसित और एडवांस्ड प्रोग्राम्स में से एक बने हैं, इसके पीछे हमारे वैज्ञानिकों की प्रतिभा, लगन और कभी हार न मानने वाली जिद का योगदान है|

ISRO

अंतरिक्ष और मिसाइल तकनीक में भारत का आज

आज भारत अंतरिक्ष विज्ञान में दुनिया के सबसे विकसित देशों में से एक है| इसरो दुनिया के सबसे दक्ष और कम खर्च में विश्वस्तरीय तकलीक उपलब्ध कराने में अग्रणी एजेंसी है| साल २०१५ से लेकर २०१८ तक इसरो की वाणिज्यिक इकाई, अंतरिक्ष कारपोरेशन लिमिटेड ने ५६०० करोड़ की आमदनी दर्ज की, जिसमे से साल २०१७-१८ में १९३२ करोड़, और साल २०१६-१७ में १८७२ करोड़ की आमदनी दर्ज की गयी थी| इसरो ने ये आमदनी अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की मार्केटिंग और रेंटिंग से अर्जित की| आज विश्व के अन्य विकसित देश और बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ अपने सैटेलाइट्स प्रक्षेपण के लिए इसरो पर भरोसा करती है|

भारत अब मिसाइल निर्यातक देश बनेगा

भारत अब दक्षिण पूर्व एशियाई देशों और खाड़ी देशों को मिसाइल निर्यात करेगा| निर्यात की पहली खेप इसी साल भेजी जाएगी| भारत के मिसाइल की कम कीमत और उच्च गुणवत्ता होने के वजह से मध्य पूर्व एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण अमरीकी देशों ने इन्हें खरीदने में रूचि दिखाई है|

 


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