गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल – मुस्लिम परिवार द्वारा हिन्दू कर्मचारी का रीति रिवाज से अंतिम संस्कार

एक ओर जहाँ देश में धार्मिक वैमनस्य फ़ैलाने के लिए कट्टर और अलगाववादी लोग तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं, वहीँ दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के भदोही से गंगा जमुनी-तहजीब की बेहतरीन मिसाल सामने आई|

तेरहवीं के लिए बांटा गया कार्ड

सूत्रों के मुताबिक भदोही में रहने वाले 65 वर्षीय मुरारी लाल श्रीवास्तव की मौत किसी जहरीले जानवर के काटने से 13 जून को हुई थी| मुरारी के परिवार में कोई मौजूद नहीं है जो उनका अंतिम संस्कार कर पाता| ऐसे में स्वर्गीय मुरारी लाल श्रीवास्तव के शव को इरफ़ान अहमद खान और फरीद खान को सौंप दिया गया| मुरारी लाल श्रीवास्तव इरफ़ान और फरीद के यहाँ ही काम किया करते थे और उनके परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य की तरह 15 साल से जुड़े हुए थे|

मुस्लिम परिवार ने की कर्मचारी की 13वीं | सांकेतिक तस्वीर

इरफ़ान अहमद खान और फरीद खान ने सपूर्ण हिन्दू रीति-रिवाज़ के साथ मुरारी लाल के शव का दाह संस्कार किया और तेरहवीं तक की सारी रस्मों को बखूबी निभाया| दसवीं के मौके पर बाल उतारने की रस्म भी निभाई गयी और तेरहवीं के दिन ब्राह्मणभोज का भी आयोजन किया गया जिसमे हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के हजारों लोगों ने भाग लिया|

ये अनूठी घटना पुरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है| इसके बारे में बात करते हुए इरफ़ान अहमद खान ने बताया, “मुरारी लाल श्रीवास्तव हमारे परिवार के सदस्य की तरह ही थे, ऐसे में ये हमारा फ़र्ज़ था की उनकी मौत के बात उनको उचित विदाई दी जाये| हमने कुछ भी अनोखा नहीं किया, हमने वही किया जो हम अपने परिवार के किसी भी अन्य सदस्य के लिए करते| हाँ जब हमने तेरहवीं का कार्ड बांटने की शुरुआत की तो लोगों को आश्चर्य जरुर हुआ| क्योंकि कार्ड में शोकाकुल परिवार में हम दोनों भाईयों का नाम लिखा था और साथ में हमारी फर्म का भी नाम था|