आंदोलनस्थल पर हर रोज बढ़ती अराजकता बताती है ये किसान तो नहीं हो सकते

आजादी के बाद देश ने कई बड़े आंदोलन देखे है। लेकिन जिस तरह का ये कृषि बिल के खिलाफ कुछ लोगों का आंदोलन दिल्ली की सीमा पर हो रहा है जिसे कुछ लोग किसान आंदोलन के नाम से पुकारते है, वैसा शायद ही किसी ने देखा होगा। आंदोलन में पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की घटना या सरकार की बर्बरता की कहानी तो हमने काफी सुनी है। लेकिन इस आंदोलन में तो खुद अपने ही लोगों को जिंदा जलाना हो या फिर देश का नाम विश्व में बदनाम करने के लिये लालकिले में हंगामा खड़ा करना हो पुलिस पर हमला करना हो या एक मासूम के साथ रेप का मामला हो, आए दिन सुनने में आ रहा है। इसी क्रम अब एक कदम आगे बढ़कर अब एक व्यक्ति के हाथ पैर काट के उसे मारकर लटकाना साफ बता रहा है कि ये आंदोलनकारी नहीं बल्कि असमाजिक तत्व हैं जिनका काम सिर्फ उत्पात मचाना है।

निहंगो ने एक दलित की निर्मम हत्या

हरियाणा के सोनीपत जिले के कुंडली बॉर्डर पर दलित लखबीर सिंह की निर्मम हत्या ने एक बार फिर किसानों के प्रदर्शन पर सवाल खड़ा कर दिया है। जिस तरह लखबीर को मारा गया वो साफ दर्शाता है कि कितनी हिंसक प्रवृत्ति के लोग इस प्रदर्शन का हिस्सा हैं जो गाहे-बगाहे आमजन पर अपनी क्रूरता दिखाते रहते हैं। बात चाहे 26 जनवरी पर हुए उपद्रव की हो या फिर किसी सामान्य दिन में व्यक्ति को जिंदा जला डालने की… ऐसा कुछ नहीं है जो पिछले एक साल से चल रहे इस प्रदर्शन में नहीं हुआ हो। हालांकि हर बार कि तरह इस बार भी घटना के बाद कुछ लोग जो इस आंदोलन को चला रहे है वो अपना मुंह सिलकर बैठ गये है ऐसे में सरकार को इनके सख्त कार्यवाही करना चाहिये जिससे आने वाले दिनो में ऐसी हरकत कोई नहीं कर सके।

किसान प्रदर्शनस्थल पर हुए हमलों और विवादों की लंबी फेहरिस्त

किसान प्रदर्शनस्थल के आसपास ये पहली बर्बर घटना नहीं है जहाँ निहंगों ने तलवार का इस्तेमाल आम जन के ऊपर किया हो। इसी साल अप्रैल में एक और व्यक्ति का हाथ काटा गया था। वो घटना भी हरियाणा के सोनीपत के कुंडली बॉर्डर की थी। शेखर नामक युवक की गलती बस इतनी थी कि वो प्याऊ मनियारी के कट से एचएसआईआईडीसी की तरफ जा रहा था। मगर, जब वह किसानों के टेंटों के साथ से निकलने लगा तो उसका एक निहंग सिख के साथ झगड़ हो गया। इसके बाद निहंग ने युवक के हाथ पर हमला कर दिया।

17 जून 2021 की तड़के 3 बजे किसानों के प्रदर्शनस्थल टिकरी बॉर्डर पर मुकेश कसार को जिंदा जलाकर मार डाला गया था। रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश को पहले शराब पिलाई गई थी। उसे शहीद बताकर पेट्रोल छिड़क कर उस पर आग लगाई गई थी।

21 जनवरी को निहंगों की हिंसक प्रवृत्ति नजर आई थी। अलीपुर में प्रदर्शन के दौरान निहंगों के साथ रहने वाले युवक रंजीत सिंह ने एसएचओ प्रदीप पालीवाल पर तलवार से हमला किया था, अधिकारी की गर्दन बाल-बाल बची थी। लेकिन हाथ चोटिल हो गया था।

16 फरवरी को सिंघु बॉर्डर के पास अलीपुर में निहंग सिख हरप्रीत सिंह ने पुलिस की कार छीनकर भागने की कोशिश की थी। 7 किमी दूर जाकर उसे पकड़ा गया था। जहाँ उसने आशीष दुबे पर तलवार चला दी थी। उस समय आशीष की गर्दन में चोट आई थी।

26 जनवरी 2021 ये वो दिन है जब सैंकड़ों किसान प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की सड़क पर उपद्रव मचाया था और निहंग सिख खुली तलवार लेकर घूमते दिखाई पड़े थे। लालकिले पर पुलिस पर हमला करना हो या फिर टैक्टर चढ़ाना हो देश ही नही सारी दुनिया ने देखा था।

इसके बाद मई के माह में एक बंगाल की लड़की से रेप की घटना ने सबको झकझोर दिया था। उससे पूर्व महिला पत्रकारों से हुई बदसलूकी ने इस प्रदर्शन में मौजूद तत्वों की पुष्टि की थी। इन सबके साथ इस प्रदर्शन की सबसे विवादस्पद चीजों में देश विरोधी नारे और शरजील इमाम और उमर खालिद के पोस्ट का प्रदर्शन भी शामिल है जो ये बताता है कि ये आंदोलन किसान हित के लिये नही बल्कि सिर्फ मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की साजिश है जिससे वो बदनाम हो सके।