चीन से सटी सीमा पर हर जवान के पास होगी दुनिया की नबंर एक असॉल्ट राइफल

पाक हो या चीन अब ये समझ ले अगर भारत पर उसने बुरी नजर डाली तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा। क्योकि भारतीय फौज का हर एक जवान अब पहले से ज्यादा हाईटेक होगा और उसका निशाना ज्यादा अचूक होगा। क्योकि जवान अब अमेरिकी सिग सॉर असॉल्ट राइफल से होगे लैस।

मेरिका से 72,000 सिग सॉर असॉल्ट राइफल की होगी खरीद

मोदी सरकार जो लगातार भारतीय फौज को मजबूत बनाने में लगी हुई है। इसी क्रम में  भारतीय सेना अमेरिका से 72,000 सिग सॉर असॉल्ट राइफल को खरीदेगी। आप को बता दे कि ये राइफल  दुनिया की सबसे बेहतरीन राइफल है। इसकी खूबियों की बात करे तो ये काफी हल्की होती है और निशाना साधने के लिए इसमें दूरबीन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ साथ रात के वक्त भी इस राइफल से अचूक निशाना लगाया जा सकता है। थल सेना के इन्फैंट्री यानि कि पैदल सेना के लिए राइफल और कार्बाइन लिये जायेंगे। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में तीन हज़ार पांच सौ सैतालिस करोड़ की लागत से 72, 400 राइफल और 93, 895 कार्बाइन की मंजूरी दी गई, करीब 13 सालों पहले सेना ने ऐसे हथियारों के लिए अनुरोध किया था, जो अब जाकर पूरी हो रही है।  ये असाल्ट राइफल और कार्बाइन नजदीकी लड़ाई में काफी कारगर होती है। इन राइफल का इस्तेमाल चीन से सटी सीमा पर तैनात सैनिक करेंगे। बताते चलें कि भारतीय सेना बड़े स्तर पर पैदल सेना का आधुनिकीकरण अभियान चला रही है, जिसके तहत पुराने और अप्रचलित हथियारों की जगह सैनिकों के लिए हल्की मशीन गन युद्धक कार्बाइन और असॉल्ट राइफल की खरीद की जा रही है

अपाचे और चिनूक के जुड़ने से सेना हुई बेजोड़

वही दूसरी तरफ अमेरिका से लिये जाने वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टर चिनूक और अपाचे की भी पूरी डेलेवरी भारत को कर दी गई है। इसी क्रम में सभी 22 अपाचे और 15 चिनूक सैन्य हेलीकॉप्टरों की भारतीय वायु सेना में डिलीवरी पूरी कर ली है और भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। एएच-64 ई अपाचे दुनिया के सबसे उन्नत बहु-भूमिका वाले लड़ाकू हेलीकाप्टरों में से एक है और अमेरिकी सेना इसका प्रयोग करती है। चिनूक का प्रयोग मुख्य रूप से सैनिकों, तोपखाने, उपकरण और ईंधन को ले जाने के लिए किया जाता है। भारत ने सितंबर 2015 में भारतीय वायुसेना के लिए 22 अपाचे हेलीकाप्टरों और 15 चिनूक की खरीद के लिए बोइंग के साथ डील की थी। अधिकारियों ने बताया कि अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टरों को पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव को देखते हुए वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगाया गया है। बोइंग ने कहा, “सैन्य हेलीकाप्टरों की इस डिलीवरी के साथ हम इस साझेदारी को जारी रखते हैं और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सही मूल्य और क्षमताएं देने के लिए भारत की रक्षा बलों के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

मतलब साफ है कि सेना की जो जो मांगे पिछले कई दशको से रुकी हुई थी उसे मोदी सरकार पल भर में पूरा करने में लगे है। जिससे समझ में आता है कि राष्ट्रहित में और देश की सुरक्षा को लेकर सरकार कितनी सजग है।