जी-7 संगठन की बैठक में पीएम मोदी के हर मुद्दे को मिला भरपूर समर्थन

विश्व में आज जितने भी संगठन हैं, हर संगठन में भारत की बात ना केवल सुना जाता है बल्कि भारत की हर बात का भरपूर समर्थन भी मिलता है। कुछ ऐसा ही दुनिया के सबसे शक्तिशाली संगठन जी -7 की बैठक में भी देखने को मिला जहां सभी देशों ने भारत के पीएम मोदी की हर बात का दिल खोलकर समर्थन किया। जो ये बताता है कि विश्व में भारत का आज क्या कद बन गया है।

आतंकवाद और आर्थिक दबाव की रणनीति के खिलाफ भरा दम

दुनिया के सबसे शक्तिशाली संगठन जी-7 की बैठक में पीएम मोदी ने तीन बार हिस्सा लिया इस दौरान पीएम मोदी ने साफ किया कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वह उनके साथ है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस की महामारी से प्रभावी तौर से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को ‘वन अर्थ-वन हेल्थ’ यानी ‘एक धरती- एक स्वास्थ्य’ का संदेश देकर फिर से यह जताया है कि भारत ‘वसुधेव कुटुम्बकम’ की भावना में विश्वास रखता है। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया को कोविड-19 रोधी टीकों के लिए पेटेंट छोड़ने पर भी गंभीरता से सोचना होगा। कोरोना वैक्सीन के पेटेंट में छूट को लेकर उन्होंने जी-7 के देशों से समर्थन देने का भी आग्रह किया। जिसके बाद जी -7 के देश पीएम मोदी के साथ खड़े दिखे इतना ही नहीं जलवायु  परिवर्तन का मुद्दा हो या आंतकवाद का हर मुद्दे पर पीएम मोदी को विश्व के ताकतवर देशों का साथ मिला। इतना ही नहीं पीएम मोदी ने इस मंच से उन लोगों के खिलाफ भी मोर्चा खोला जो आर्थिक दबाव बनाकर कहीं न कहीं दूसरे देश को परेशान करते हैं। जो ये बताता है कि कैसे पिछले 7 सालों में भारत ने विश्व के बीच अपनी साख बनाई है।

तीन बार बैठक में हुए शामिल

पीएम मोदी जी-7 और विशेष आमंत्रित देशों की बैठक में देश में कोरोना की स्थिति की वजह से हिस्सा लेने नहीं जा सके थे। पिछले दो दिनों में उन्होंने तीन दफे इस बैठक में वर्चुअल तरीके से शिरकत की। मुक्त समाज एवं मुक्त अर्थव्यवस्था यानी ओपन सोसायटीज एंड ओपन इकोनोमीज सत्र में पीएम मोदी एक प्रमुख वक्ता के तौर पर शामिल हुए। इसमें उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था, विचारों की उदारता व स्वतंत्रता के प्रति भारत की पारंपरिक प्रतिबद्धता के बारे में बताया और कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने के नाते भारत सत्तावादी व्यवस्था, आतंकवाद व हिंसक जातिवाद, गलत सूचना के प्रसार और आर्थि‍क दबाव की रणनीति से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए जी-7 और मेहमान देशों का प्राकृतिक तौर पर मित्र राष्ट्र है।

आप इस बात से पीएम मोदी के कद को समझ सकते हैं कि वो इस बैठक में जा नहीं पाये लेकिन हर नेता के सामने लगी स्क्रीन में सिर्फ मोदी जी ही दिख रहे थे, विश्व की 40 फीसदी अर्थव्यवस्था पर कायम इन देशों के नेता सिर्फ मोदी जी को सुनने के लिये बेकरार थे और हो भी क्यो ना  आखिर मोदी जी ही ऐसे नेता हैं जो विश्व कल्याण के बारे में सबसे ज्यादा सोचते हैं और उसके लिये काम भी करते हैं।