इंजीनियर बेटी ने सरपंच बनकर बदल दी गांव की तस्वीर

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कहते है न जहां चाह वहां राह, बस मन में जज्बा होना चाहिए कुछ कर दिखाने का, रास्ते तो फिर निकल ही आते है। कुछ ऐसा ही हरियाणा के कैथल जिले के ककराला-कुचिया गांव में देखा गया है। जो आज कई बड़े शहरों को भी पीछे छोड़ रहा है। इसी गांव की सरपंच बेटी प्रवीण कौर के चलते जो इंजिनियर होने के बाद कुछ नया करने के लिए इस गांव से सरपंच बनी और उन्होने वो कर दिखाया जो दूसरे नामुकिन समझते थे।

गांव में सड़क पानी,सीसीटीवी और सोलर लाइट्स की व्यवस्था

प्रवीण ने जब सरपंच की कमान संभाली, तो गांव की हालत कुछ खास बेहतर नही थी, खासकर सुरक्षा व्यवस्था के चलते यहां कि लड़कियां स्कूल नही जा पाती थी क्योकि उन्हे डर लगता था। इस भय को दूर करने के लिए सबसे पहले गांव की हर सड़क को सीसीटीवी कैमरे से लैस किया। बिजली गांव में थी, लेकिन बस नाम के लिए, ऐसे में गांव में बिजली हर वक्त रहे इसके लिए सोलर लाइट की व्यवस्था करी। जिसका असर ये हुआ कि आज गांव की लड़कियां स्कूल जाती है, तो महिलाएं बिना किसी डर के कहीं भी जा सकती हैं। इसके साथ साथ गांव के लोगो को जागरूक भी किया गया इसके लिए ग्राम पंचायत में लाइब्रेरी खोली गई जिससे ज्यादा से ज्यादा ज्ञान बच्चों को मिल सके। वही गांव के 10वीं तक स्कूल को  अपग्रेड करके 12वीं तक करवाया। सड़क की व्यवस्था को दुरूस्त किया गया। वही आज गांव के घर घर साफ पानी नालों से आता है जिसका असर ये हुआ कि गांव की सूरत बिलकुल बदल गई है।

बच्चा-बच्चा बोलता संस्कृत

वैसे विकास के मामले में ये काम तो आत्मनिर्भर हुआ ही है, लेकिन इस गांव की एक खासियत ये है कि गांव का बच्चा-बच्चा संस्कृत बोलता है यानी कि भारतीय संस्कृति की एक अनोखी छाप इस गांव में देखी गई है। इसके लिए गांव के स्कूल में संस्कृत का टीचर रखा गया, तो लोगो को संस्कृत भाषा के लिए जागरूक करने का पूरा का पूरा अभियान चलाया गया। नतीजा ये हुआ कि गांव में आज हर बच्चा संस्कृत में बोल और लिख सकता है।

 

प्रवीण कौर शहर में पली बढ़ीं, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग भी की, लेकिन किसी मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने के बजाय गांव के लिए काम करने का फैसला लिया। 2016 में जब वह सरपंच बनीं थीं, तब उनकी उम्र महज 21 साल थी। वह हरियाणा की सबसे कम उम्र की सरपंच हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं। छोटे से गांव से की गई ये बड़ी सी पहल बहुत लोगो को रास्ता दिखा सकती है, जिनके मन में अपने गांव या शहर को बेहतर करने की इच्छा होगी और ऐसे ही लोगों से देश आत्मनिर्भर भारत की नई तस्वीर लिख सकेगा।


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