गरीब का सशक्तिकरण आज सर्वोच्च प्राथमिकता तभी तो देश की बदल रही तस्वीर

पिछले 7 वर्षों से देखा जा रहा है कि पीएम अगर कोई योजना की शुरूआत करते हैं तो वो लगातार उसके बारे में जानकारी भी रखते हैं। खासकर वो योजना जिसका फायदा देश के गरीबों को सबसे ज्यादा होता हो। इसी क्रम में खुद पीएम मोदी ने गरीब कल्याण अन्न योजना के गुजरात के लाभार्थियों के साथ बातचीत की और जाना कि वहां लोगों को इस योजना का फायदा ठीक तरह से मिल रहा है या नहीं।

गरीब को सस्ते भोजन के लिए 2014 के बाद नए सिरे से हुआ काम

आजादी के बाद से ही करीब-करीब हर सरकार ने गरीबों को सस्ता भोजन देने की बात कही थी। सस्ते राशन की योजनाओं का दायरा और बजट साल दर साल बढ़ता गया, लेकिन उसका जो प्रभाव होना चाहिए था, वह सीमित ही रहा। देश के खाद्य भंडार बढ़ते गए लेकिन भुखमरी और कुपोषण में उस अनुपात में कमी नहीं आ पाई। इसका एक बड़ा कारण था प्रभावी डिलिवरी सिस्टम का न होना। इस स्थिति को बदलने के लिए साल 2014 के बाद नए सिरे से काम शुरू किया गया। करोड़ों फर्जी लाभार्थियों को सिस्टम से हटाया गया। आधार को राशन कार्ड से जोड़ा गया और सरकारी राशन दुकानों में डिजिटल टेक्नोलॉजी को लाया गया।

राशन कार्डधारकों को लगभग डबल मात्रा में मिल रहा राशन

पीएम मोदी ने कहा कि आज राशन कार्ड पर 2 रुपये किलो गेहूं, 3 रुपये किलो चावल के कोटे के अतिरिक्त हर लाभार्थी को पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 5 किलो गेहूं/चावल मुफ्त दिया जा रहा है। यानि इस योजना से पहले की तुलना में राशन कार्डधारकों को लगभग डबल मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। यह योजना दिवाली तक चलने वाली है। आज देश इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लाखों करोड़ खर्च कर रहा है, लेकिन साथ ही सामान्य मानव के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए, ईज ऑफ लिविंग के लिए नए मानदंड भी स्थापित कर रहा है। गरीब के सशक्तिकरण को आज सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

ओलंपिक का भी किया जिक्र

पीएम मोदी ने चल रहे ओलंपिक खेलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस बार ओलंपिक्स में भारत के अब तक के सबसे अधिक खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया है। ये 100 साल की सबसे बड़ी आपदा से जूझते हुए किया गया है। कई तो ऐसे खेल हैं जिनमें हमने पहली बार क्वालीफाई किया है और सिर्फ क्वालीफाई ही नहीं किया बल्कि कड़ी टक्कर भी दे रहे हैं। आगे कहा कि भारतीय खिलाड़ियों का जोश, जुनून और जज्बा आज सर्वोच्च स्तर पर है। यह आत्मविश्वास तब आता है जब सही टैलेंट की पहचान होती है, उसको प्रोत्साहन मिलता है। यह आत्मविश्वास तब आता है जब व्यवस्थाएं बदलती हैं, पारदर्शी होती हैं। यह नया आत्मविश्वास न्यू इंडिया की पहचान बन रहा है।

ऐसा सिर्फ ओलंपिक में ही नही बल्कि देश के दूसरे सेक्टर में भी देखा जा रहा है क्योंकि पिछले 7 सालों से हर तरफ एक सकरात्मक विचार की हवा बहती हुई दिख रही है और लोगों को विश्वास हो रहा है कि देश सच में विकास की तरफ चल रहा है।