आइये देखें, अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

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Ram_Mandir_Ayodhya

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला दिया है। दशकों से लंबित अयोध्या में राम मंदिर (Ram Mandir) निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह विवादित स्थान पर मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित करे। पीठ ने फैसले में कहा कि 2.77 एकड़ की विवादित भूमि का अधिकार राम लला की मूर्ति को सौंप दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सभी लोग स्वागत कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी है जिसका इस फैसले से उनकी जिंदगी पर बड़ा व्यापक असर हुआ है। आइये आज हम आपको कुछ ऐसे ही लोगों से रूबरू करवाते है :

उर्मिला चतुर्वेदी ने 27 साल लंबे संकल्प को समाप्त किया

जबलपुर शहर की 81 वर्षीया महिला उर्मिला चतुर्वेदी ने 27 साल बाद अन्न ग्रहण किया। दरअसल उर्मिला चतुर्वेदी ने राम जन्मभूमि विवाद का समाधान होने तक अन्न ग्रहण नहीं करने का संकल्प लिया था। इस बिच वह केवल दूध और फलाहार के सहारे थीं।

महिला के परिवार के एक सदस्य ने कहा कि अयोध्या मामले पर शनिवार को शीर्ष अदालत का फैसला आने के बाद अयोध्या में राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया है। शीर्ष अदालत का यह फैसला सुनकर उनके परिवार वाले बहुत खुश हैं। उर्मिला चतुर्वेदी के बेटे विवेक चतुर्वेदी के मुताबिक “मेरी मां पिछले 27 साल से फलाहार और दूध के आहार पर थीं। अब, उनका उपवास तोड़ने के लिए जल्द ही एक धार्मिक कर्म किया जाएगा।“ विवेक ने कहा, मेरी मां भगवान राम की अनन्य भक्त हैं और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए समाधान का इंतजार कर रही थीं।

effect of Supreme Court's decision on Ayodhya case

18 साल से नंगे पांव घूम रहा राम भक्त, अब पहनेगा चप्पल

अयोध्या में विवादित रामजन्म भूमि- बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार के किशनगंज के एक राम भक्त देवदास उर्फ देबू दा की खुशियों का ठिकाना नहीं है। अब ये राम भक्त चप्पल और जूते पहन सकता है। दरअसल, इस शख्स ने प्रण किया था कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता तब तक वो नंगे पांव रहेगा। अब राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर यह शख्स 18 साल बाद अपने पैरों में चप्पल पहनेगा।

38 वर्षीय देबू दा ने 18 साल पहले प्रतिज्ञा ली थी कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वो नंगे पांव रहेंगे। अब राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद देबू दा अयोध्या में जाकर चप्पल पहनेंगे।

गौरतलब है कि वर्ष 2001 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त नहीं हो जाता है, तब तक वो चप्पल नहीं पहनेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशियां जताते हुए देवदास ने कहा कि उनका प्रण अब पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि अब वो किसी भी दिन अयोध्या जाकर रामलला का दर्शन करेंगे और वहीं अपने पांव में चप्पल पहनेंगे।

पटना में युवाओं में बढ़ी धर्म के प्रति दिलचस्पी

अयोध्या में विवादित रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार (Bihar) की राजधानी पटना में भगवान राम से जुड़ी साहित्य में लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है। खासकर युवा, रामचरित्रमानस या राम की जीवनी से जुड़ी किताबें ज्यादा खरीद रहे हैं। पटना पुस्तक मेला (Patna Book Fair) में प्रकाशकों का कहना है धार्मिक किताबों में राम के किताबों कि बिक्री सबसे ज्यादा हो रही हैं। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महज तीन दिन में ही यहां भगवान राम की पुस्तकें आट ऑफ स्टाक हो गई हैं।

दरअसल, पटना के गांधी मैदान में इन दिनों पुस्तक मेला लगा हुआ है। इस पुस्तक मेले में राज्य भर से लोग किताबें खरीदने आते हैं। यूं तो पटना पुस्तक मेले में कई प्रकाशकों की स्टॉल लगी हैं, लेकिन इस बार लोग धर्म ग्रंथों में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। यही कारण है कि मेले में धार्मिक बुक्स स्टॉल पर लोगों की ज्यादा भीड़ देखी जा रही है। इनमें युवकों की संख्या सबसे ज्यादा है।

एक प्रकाशक ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों में भगवान राम की किताबें सबसे ज्यादा खरीदी जा रही हैं। प्रकाशक का कहना है कि यहां आने वाले युवाओं की रुचि भगवान राम की जीवनी को जानने में ज्यादा है।

 


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