पहले मोदी को बताया ‘प्रमुख विभाजनकारी’, नतीजे आते ही बदल दी विचारधारा

TIME changes with time

हमारे समाज में ऐसे बहुत लोग है जिनको दूसरों की निंदा और आलोचना करने में आनंद मिलता है| खास कर अगर कोई बहुत अच्छा काम करता है, आगे बढ़ता है, तो लोग उसमे कमियां ढूंढने लगते है, ताकि उसको नीचा दिखाया जा सके|

आज हम ऐसी ही एक आलोचना के बारे में बात करेंगे जो PM नरेन्द्र मोदी के लिए की गई थी और कैसे ये आलोचना 15 दिनों के अन्दर ही तारीफ में बदल गयी

लोकसभा चुनाव के दौरान 10 मई को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात पत्रिका टाइम ने नरेन्द्र मोदी के ऊपर एक आर्टिकल प्रकाशित किया था, जिसमे उन्होंने PM मोदी को “भारत का डिवाइडर इन चीफ” यानी “प्रमुख विभाजनकारी” बताया था| लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने के बाद 28 मई को टाइम ने अपने वेबसाइट पर PM मोदी के लिए एक और आर्टिकल प्रकाशित किया जिसका शीर्षक है, “मोदी हैज यूनाइटेड इंडिया लाइक नो प्राइम मिनिस्टर इन डेकेड्स”, यानी मोदी ने भारत को इस तरह एकजुट किया है जितना दशकों में किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया। हैरान करने वाली बात ये है कि एक ही मैगज़ीन में एक ही इन्सान पर लिखे दो आर्टिकल में उनकी छवि बिकुल अलग है, बिलकुल उल्टी|

28 मई को टाइम के वेबसाइट पर आये नरेन्द्र मोदी के बारे में आर्टिकल को मनोज लाडवा ने लिखा है, जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान “नरेंद्र मोदी फॉर पीएम” अभियान चलाया था। लाडवा ने अपने आर्टिकल में लिखा है, “मोदी के सामाजिक रूप से प्रगतिशील नीतियों ने सभी भारतियों को, चाहे वो हिन्दू हो या कोई धार्मिक अल्पसंख्यक, सभी को गरीबी से बाहर निकाला है|” लाडवा ने अपने आर्टिकल में ये भी लिखा कि, “मोदी के नीतियों पर विपक्ष के बोले कटु वचन और उनके आलोचनाओ के बावजूद नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल में और इस चुनाव में भी भारतीय वोटरों को एकजुट करके रखा, जितना की कोई भी प्रधानमंत्री पिछले पांच दशक में नहीं कर सका|”

अब बात करते है टाइम मैगज़ीन के इसी महीने के 10 मई वाले PM मोदी पर लिखे आर्टिकल के बारे में| इस आर्टिकल को पत्रकार आतिश तासीर ने लिखा था| आतिश ने लिंचिंग के मामलों और यूपी में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने समेत कई बातों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की थी। चुनाव के बीच आये टाइम के इस आर्टिकल ने काफी सुर्खियाँ बटोरी| जो लोग मोदी के समर्थक थे उन्होंने टाइम के इस कवर स्टोरी की आलोचना की, वही मोदी के विरोधियों ने आग में घी डालने का काम किया और इस मुद्दे को और तूल देने की कोशिश की| पर मोदी की जनता के बीच लोकप्रियता और जनता का मोदी के प्रति उनका विश्वास इस प्रकार अटूट हो चूका है की ऐसी आर्टिकल्स का जनता पर कोई असर देखने को नहीं मिला|

जैसा की हम जानते हैं, मोदी की आलोचना करने वालों को हमेशा मुँह की खानी पड़ती है | PM मोदी की तारीफ में लिखा गया टाइम मैगज़ीन का 28 मई का आर्टिकल उसकी वेबसाइट पर अभी सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले आर्टिकल में टॉप पर है।

वैसे तो इस बात में भी कोई संदेह नहीं है की PM मोदी ने हमेशा ही “सबका साथ सबका विकास” को अपना मूल मंत्र बना कर काम किया है | उन्होंने हमेशा ही अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने की कोशिश की है| ऐसे में उन्हें ‘प्रमुख विभाजनकारी’ जैसा शीर्षक देना बेवकूफी होगी|