किसानों के धरने के चलते हर दिन दिक्कतों से होना पड़ता है दो चार

करीब 3 महीने से ज्यादा दिल्ली के आसपास के नेशनल हाइवे तथाकथित किसानों ने बंधक बनाये रखा है जिससे हर रोज करोड़ रूपये का नुकसान लगातार हो रहा है। व्यापारी संगठन कैट की माने तो सीमा पर जाम होने के चलते अभी तक 12 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है तो हजारों वाहन खेत खलिहान के पास से निकल रहे है जिससे खेती को भी नुकसान हो रहा है। 

देश की राजधानी के बॉर्डर्स का हाल

देश की राजधानी के कई बॉर्डर्स पर आजकल यही हालात हैं। किसान आंदोलन का अधिकार लोगों के सड़क पर चलने के अधिकार के आड़े आ चुका है। दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर 26 नवंबर 2020 से किसान आंदोलन चल रहा है। देश का सबसे लंबा नेशनल हाइवे नम्बर 44 इसकी वजह से बंधक बना हुआ है। श्रीनगर से कन्याकुमारी यानी देश के उत्तर को दक्षिण से जोड़ने वाला ये हाइवे देश की राजधानी में आते ही बेकार हो जाता है। वैसे तो ये हाइवे 3  हज़ार 745 किलोमीटर लम्बा है, लेकिन दिल्ली में इस हाइवे का 12 किलोमीटर का हिस्सा अब किसी काम का नहीं है। सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के नाम पर सड़क बंद है और इसकी वजह से आसपास के गांवों की गलियों में ट्रैफिक जाम लग रहे हैं जिससे आसपास के रहने वाले लोगों की हालत खराब हो चुकी है।

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छोटी सी सड़क बनी हाइवे का विकल्प

नेशनल हाइवे 44 को आप जी टी करनाल रोड के नाम से भी जानते हैं, वहां पहुंचने के लिए आजकल एक छोटी सी सड़क से होकर जाना पड़ रहा है। दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर बने सिंघु गांव की एक छोटी सी सड़क है और ये हाइवे का विकल्प है। फिलहाल दिल्ली से जीटी करनाल रोड यानी नेशनल हाइवे 44 पर पहुंचने के लिए यही रास्ता है। लेकिन इस रास्ते के प्रयोग करने से इलाके में होने वाली खेती पर भी बुरा प्रवाह पड़ रहा है, लगातार प्रदूषण के चलते खेती खरीब हो रही है। कुछ यही आलम दूसरे जगह भी देखा जा रहा है।

करोड़ो रूपये का हर दिन हो रहा नुकसान

दूसरी तरफ करोबारियों की माने तो इस आंदोलन से करोड़ रूपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है तो दूसरी तरफ इन हाइवे के पास रहने वाले हजारों लोग के रोजगार पर भी प्रभाव पड़ा। शायद इसी बात को ध्यान में रखकर अब कोर्ट ने भी साफ किया है कि हर जगह आंदोलन करना ठीक बात नही है इससे देश को काफी नुकसान होता है। यहां आपको याद होगा कि पिछले साल ऐसे ही शाहीन बाग इलाके में सड़क रोककर रखने के चलते आसपास के लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पडा था इसके साथ साथ आकड़े बताते है की रोड बंद होने के चलते करीब 6 लोगो की जाने भी गई थी।

ऐसे में अब हमारे देश की सरकार और लोगों को ये विचार जरूर करना चाहिये कि हर जगह धरना देना कितना वाजिब है क्योकि इससे वो अपना और देश की जनता का बस नुकसान ही करते है। इसी लिये संविधान के जनक भीमराव अंबेडकर ने बोला था कि आजादी के बाद आंदोलन तो होने चाहिये लेकिन धरना प्रदर्शन की एक विशेष जगह होनी चाहिये जिससे आम लोगो को दिक्कत न हो सके।