नियमों में छोटे से बदलाव से सरपट दौड़ेगा आर्थिक चक्का

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कोरोना काल रीफार्म  और परफार्म का दौर है, इस काल में वो ही देश आगे बढ़कर कोरोना को हरा पायेगा जो पुराने रास्तों पर चलने के बजाये खुद के नये रास्ते बनायेगा। कुछ इसी तरह का काम मोदी सरकार लगातार देश में कर रही है। तभी तो दुनिया के देश आज भारत का लोहा मान रहे हैं। उदाहरण के तौर पर 20 लाख करोड़ का जो पैकेज मोदी सरकार ने आम जन के लिये ऐलान किया है उसमे कुछ पुराने कानून को भी बदला गया है जिसका असर ये देखा जायेगा कि छोटे किसान हो या फिर कामगार या छोटे उघोग करने वाले लोग सभी के जीवन में एक बड़ा बदलाव देखा जायेगा।

65 साल पुराने कानून से किसानों को दी आजादी

मोदी सरकार कई गुना आगे का सोचकर काम करती है। इसमे कोई भी संदेह नही कर सकता है। इसकी जीती जागती मिसाल बना है APMC एक्ट में बदलाव इस 65 साल के एक्ट में बदलाव करके सरकार ने किसानों को एक तरह से आसमान में उड़ने की पूरी छूट दे दी है। क्योकि अब किसान देश के किसी भी कोने में अपनी उपज को बेच सकते हैं। यानी जहां उन्हें ज्यादा मुनाफा दिखे वहां वो सामान ले जा सकते हैं। इसके साथ साथ अपनी फसल का खुद तय कर सकेंगे दाम, खुद कर सकेंगे ब्रांडिंग और मार्केटिंग जबकि पहले किसान सिर्फ लोकल मार्केट में ही अपनी फसल बेच सकते थे लेकिन अब जहां ज्यादा मुनाफा दिखे वही पर वो माल बेच सकते हैं। इससे किसानो की आय दोगनी तो होगी साथ ही पीएम मोदी का लोकल के लिए वोकल का सपना भी सच होगा। मतलब साफ है कि अन्नदाता के जीवन में कोरोना काल में अमूलचूक विकास हो इसका ध्यान सरकार पूरी तरह से रख रही है न कि केवल अभी कुछ आर्थिक सहायता करके आने वाले दिनो में हालात जस के तस बनाना चाहती है। इसलिये जिस तरह पैकेज के पैसे का उपयोग हो रहा है इससे नवभारत का निर्माण होगा जिसमे किसानों का योगदान सबसे अधिक होगा।

एमएसएमई की बदली परिभाषा

जिस तरह से सरकार ने किसानों के हित के लिए एक एक्ट में बदलाव करके किसानों के जीवन में अमूलचूक परिवर्तन किया है। ठिक उसी तरह सरकार ने एमएसएमई  को लेकर नियम में भी थोड़ा बदलाव किया है लेकिन इसका असर आने वाले दिनो में खूब देखा जायेगा. सरकार ने राहत पैकेज के दौरान 10 करोड़ निवेश व 50 करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनियों को भी लघु उघोग में शामिल किया है। ऐसा सरकार ने इसलिये किया है कि रियायत का फायदा ज्यादा से ज्यादा कंपनियो को मिल सके। इसलिये करोबारियों की वर्षों पुरानी मांग को सरकार ने मान ली है। इससे ये कंपनियां रोजगार को बढ़ावा दे सकेगी तो दूसरी तरफ लोकल से वोकल की ओर देश को ले जा सकेगी। इसमें कोई दो राय नही है कि छोटे कारोबारी से ही देश की आर्थिक पहिये की रफ्तार तेजी से दौड़ती है। इसकी स्पीड बढ़ाने के लिए सरकार ने छोटा सा बदलाव करके सिर्फ ग्रीस लगाने का काम किया है लेकिन देखने वाली बात ये होगी कि इस एक नियम बदलने से ही देश में रोजगार और आत्मनिर्भर बनने की शुरूआत होगी।

मोदी सरकार 20 लाख करोड़ रूपये से न केवल कोरोना महामारी को हराने की सोच रही है बल्कि बदली दुनिया में बदले भारत की तस्वीर को कैनवास में उतार रही है। जिससे ये साफ होता है कि जब पूरी तस्वीर बन जायेगी तो भारत दूसरे देशो से कई गुना आत्मनिर्भर और ताकतवर दिखने लगेगा।


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