ओछी सियासत और हमारी कोताही से देश में कोरोना के चलते कुछ राज्यों में मची चितकार

वक्त की मार है या फिर इंसान का प्रकृति के साथ खिलवाड़ कि कोरोना का दंश आज एक बार फिर से देशवासियों को चुभने लगा है। प्रवासी मजदूर भाइयों की पिछले साल कि वो तस्वीरे अभी जेहन से उतर ही नहीं पाई थी कि नई तस्वीरे फिर से एक बार दिल को घायल कर रही है। कहां पर हमारी प्रशासनिक व्यवस्था में चूक हुई कि कोरोना को हराने में सबसे आगे होने के बावजूद हम आज खुद कोरोना कि गिरफ्त में पहुंच गये जिसके चलते अस्पतालों से शमशानों से और सड़को पर निकले अपने घर जाने वाले प्रवासी मजदूरों की तस्वीर हमें डराने लगी है।

कोरोना से होना होगा और अधिक सावधान

देश में कुछ लोगों की कोताही का शिकार आज समूचा देश बन रहा है। हर तरफ चीत्कार की आवाज गूंज रही है। श्मशान में कौतूहल है तो अस्पतालो में अफरातफरी का माहौल उसपर रोजीरोटी की चिंता ने लोगों को मीलों सफर के लिये खानाबदोश बना दिया है। आलम ये है कि बस तस्वीर देख कर यही लगता है कि भगवान हैं तो कहां? वैसे ऐसा मंजर न बने इसके लिये वैक्सीन की शुरूआत करते हुए खुद पीएम मोदी ने देशवासियों को एक नारा दिया था कि दवाई भी और कढ़ाई भी लेकिन इसके बावजूद कुछ लोगों ने लापरवाही के चलते देश को आज कहां लाकर खड़ा कर दिया है। कुछ राज्यों से सिर्फ सियासत के चलते केंद्र की बातो को दरकिनार किया जिसका असर आज उनके राज्यों में स्थिति भयावर हो गई जो उनकी जनता के प्रति गैर संवेदनशीलता को दर्शाता है। पर मजे की बात इसमे ये है कि हालात खराब होने के बाद ये लोग जनता को मूर्ख समझते हुए सारा दोष केंद्र पर डालने में लगे है। जबकि केंद्र इस वक्त तेजी के साथ कोरोना माहामारी से झूझ रहे राज्यो के लोगो की जान बचाने के लिये युध्दस्तर पर काम कर रहा है। सेना अस्पताल बना रही है रेलवे ऑक्सीजन पहुंचा रही है। वैक्सीन की कमी न हो इसके इतंजाम मे रात दिन तैयारियां की जा रही है। लेकिन कुछ लोग ट्वीट करके सिर्फ नकरात्मकता फैलाकर माहौल को और खराब करने में लगे  है जिनसे हमें सावधान रहना चाहिये।

उपवास के बाद भी पीएम मोदी की कोरोना को लेकर मैराथन बैठक

ऐसे भयावर स्थिति में कुछ लोग बस ये पूछ रहे है कि पीएम आखिर कर क्या रहे है तो ये उनके लिये है कि वो जान लें कि पीएम मोदी इस वक्त बयान बाजी न करके सिर्फ देश को कोरोना से बचाने में जुटे है। जिसका उदाहरण सोमवार को दिखा जब पीएम मोदी उपवास के दौरान भी लगातार मैराथन बैठक करते रहे। सुबह पीएम मोदी ने सबसे पहले वैक्सीनेशन, ऑक्सीजन और टेस्टिंग को लेकर अधिकारियों से समीक्षा कि दो दोपहर के वक्त उन्होने देश के कई राज्यों के सीएम के साथ राज्य के हालचाल पर चर्चा करते हुए कोरोना को रोकने का प्लान बनाया इसी तरह शाम होते होते उन्होने देश कई नामी अस्पताल के डॉक्टरो से कोरोना पर लगाम लगाने और दवा कंपनियों से दवा की आपूर्ती ठीक तरीके से हो इसके लिये चर्चा की। तो रात के वक्त वैक्सीन 18 साल तक के लोगों के लग सके। इसकी समीक्षा करके वैक्सीन 18 साल तक के लोगों के लगेगी का ऐलान किया। पीएम मोदी ने जिस तरह से कोरोना से निपटने का कमान संभाली है तब से लगने लगा है कि देश में कोरोना को खत्म करने के लिये कदम उटाया जा रहा है।

वैसे पीएम मोदी की कार्यकुशलता का लोहा तो सारा जग मानता है और देश की जनता को उन पर पूरा विश्वास है कि वो देश को इस आपदा से निकालेंगे और अब तो विपक्ष के नेता भी उनसे गुहार लगाकर बोल रहे है कि वही इस स्थिति से बचा सकते है और जिस तरह से मौत का तांडव कुछ राज्यो में दिख रहा है वो खत्म हो सकता है।