पूर्वी लद्​दाख में डटे जवानों की दहाड़ से कांप रहा ड्रैगन

कदमो से मिलते है कदम, कदमो से कदम मिलते है

हम चलते है जब ऐसे तो दुश्मन के दिल हिलते है

ये सिर्फ गाना नही बल्कि हकीकत है भारतीय फौज के साहस और शौर्य को विश्व में कौन नही जानता सभी देश भारतीय फौज के साहस के आगे नतमस्तक रहते है। इसी कड़ी में एक बार फिर हमारे जवानो ने दिखा दिया कि हालात कैसे भी हो लेकिन भारत माता की सेवा में उन्हे कोई नही पीछे हटा सकता है फिर चाहे बर्फीली चोटियां हो या तापमान शून्य से करीब 35 डिग्री नीचे क्यो न हो, शरीर को जमा देने वाली ठंड क्यो न हो। ऐसी भीष्म परिस्थितियों और मुश्किल हालात में भी पूर्वी लद्​दाख में वास्तिविक नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय रणबांकरों का जोश हिलोरे मार रहा है। जबकि चीनी फौज इस मुश्किल हालात में पैर पीछे खीच लिये है जहां एक तरफ चीनी फौज पहले लद्दाख की चौकियों से हर दिन अपने जवान बदल रही थी तो अब एक साथ 10 हजार फौज को पीछे बुला लिया है।

लद्दाख में बर्फ में लड़ने में दक्ष है भारतीय सेना

लद्दाख जैसे दुर्गम इलाके में भारतीय सेना हर समय आपरेशनल मोड में रहती है। भारतीय सेना वर्ष 1984 से लद्दाख में विश्व के सबसे उंचे युूद्ध् स्थल सियाचिन में दुश्मन के साथ निष्ठुर मौसम के साथ लड़ रही है। लद्दाख के कारगिल में वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने अपने बुलंद हौंसले से दुश्मन को परास्त किया था। अब चीन का सामना स्पेशल फोर्स, गोरखा, कारगिल जीतने वाली इन्फैंटरी की बटालियनों, लद्दाख स्काउट्स जैसी बटालियनें हैं जो युद्ध के मैदान में तप कर तैयार हुई हैं। वहीं सामने चीन की सेना में अनुभव व हौंसले, दोनों की कमी है। वही पूर्वी लद्दाख की बफीर्ली चोटियों के पर चीन से बदला लेने को तिब्बती शेर घात लगाए बैठे हैं। वे सेना के साथ पैरा कमांडो के रूप में चीन के खिलाफ मैदान में है। तिब्बती सैनिकों की स्पेशल फ्रंटियर फोर्स अपने शहीद डिप्टी लीडर 51 वर्षीय नईमा टेनजिन का बदला लेने के लिए मौके की तलाश में है। नईमा टेनजिन भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम ब्लैक टाप चोटी पर कब्जा करते हुए शहीद हुए थे। उनके साथ 24 वर्षीय तिब्बती सैनिक टेनजिन लोधेन घायल हुए थे जिसके बाद ही भारतीय सैनिको में बदला लेने का मन बनाये बैठे है।

चीन की फौज नही झेल पाई बर्फीली ठंड

दूसरी तरफ चीनी फौज है जो वैसे ये दवा करती नही थकती की उनकी फौज हर मौसम में दुश्मन से दो दो हाथ कर सकती है लेकिन जैसे ही लद्दाख में ठंड बढ़ी चीन की फौज की हकीकत भी सामने आने लगी चीनी फौजी हर दिन चौकियों मेंबदले जाने लगे और अब तो आलम ये हो गया कि एक साथ 10 हजार फौज को सीमा से पीछे किया गया है जो ये बतलाता है कि चीनी भारतीय फौज के सामने कहा टिकती है। वैसे इससे पहले भी भारतीय फौज ने गलवान घाटी में चीन को ये बता दिया था कि उनमे कितना दम है लेकिन जिस तरह से ठंड से चीन का बुरा हार है उससे साफ हो गया है कि चीन भारतीय फौज के आगे कही नही टिकता है।

वैसे इसके पीछे चीन की चाल भी हो सकती है। ऐसे में भारतीय फौज और ज्यादा चौकस हो गये है क्योकि इतिहास गवाह है कि चीन सिर्फ पीठ में छूरा घोपना जानता है। लेकिन इसबार चीन ऐसा करेगा तो ये समझ ले कि बुरी मौत मरेगा।

 

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