चिठ्ठी न कोई सन्देश जाने वो कौन सा देश कहां तुम चले गये

शुक्रवार का दिन देश के लिये बहुत भारी पड़ा क्योकि आज के दिन काल के कपाल में वो लोगों समां गये जिन्हे शायद ही हम कभी भूल सकते थे और ये सब हुआ कोरोना की दूसरी लहर के चलते जिसके चलते देश ने एक ही दिन में एक नामी पत्रकार रोहित सरदाना तो दूसरो को जोश का जज्बा भरने वाला नाम सूटर दादी वही हमेशा गरीबों की आवाज बनने वाले देश के महान पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी को कोरोना छीन ले गया।

नि:शब्द है कलम

क्या लिखू कलम चल ही नहीं रहा है लेकिन वो कहते है न कि गम़ बांटने से कम होता है बस इसी लिये आपके बीच में अपना गम़ साझा कर रहा हूं। दोस्तो आज लग रहा है कि मैं बेबस हूं क्योकि कुछ सूझ ही नही रहा है चारो तरफ अंधेरा छाया हुआ है। लेकिन फिर याद आता है कि हिम्मत ना हारिये बिसारिये ना राम और इसी मंत्र के चलते कोरोना से जंग लड़ने के लिये तैयार हो जाते है लेकिन आज देश को कोरोना ने जो नुकसान पहुंचाया है शायद ही उसको भरा जा सके। क्योकि रोहित सरदाना ऐसे पत्रकार के जाने से अब पत्रकारिता का बेपाक नजरिया कही खोता हुआ दिख रहा है तो करोड़ो युवाओ के अंदर जज्बा भरने वाली शूटर दादी चंदो के जाने से लग यही रहा है जैसे आत्मबल खत्म सा हो गया हो वही हमेशा गरीबों को इंसाफ दिलाने में आगे रहने वाले पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी निधन से यही लग रहा है कि देश कैसे इतनी बड़े नुकसान को सह पायेगा।

पीएम मोदी ने भी दुख जताया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी मौत पर संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा, ‘रोहित सरदाना ने हमें बहुत जल्द छोड़ दिया। ऊर्जा से भरपूर, भारत की प्रगति को लेकर अग्रसर, एक अच्छे इंसान को हमनें खो दिया। उनके असामयिक निधन ने मीडिया जगत में एक बहुत बड़ी जगह खाली कर दी है। उनके परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना.शांति।’ इसी तरह पीएम नरेंद्र मोदी ने सोराबजी के निधन पर शोक जताते हुए कहा, ‘वह उन लोगों में से थे जिनकी भारत के संवैधानिक कानूनों के विस्तार में प्रमुख भूमिका रही। गरीबों और दलितों की मदद करने में ये सबसे आगे थे। उन्हें भारत के लिए किए गए महान कार्यों के लिए याद किया जाएगा उनके निधन से दुखी हूं’।

फिलहाल अब तो दिल बस यही बोल रहा है कि वक्त तेजी से निकल जाये जिससे एक नया कल हो जिसमें फिर से जीवन नये रंग में रंगा दिखे। यही कामना करता हूं।